कड़ाके की ठंड में बिजली संकट ने लोगों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। आठ से बारह घंटे तक की कटौती से लोगों को शीतलहर में दोहरी मार पड़ रही है। जम्मू कश्मीर में केंद्रीय और राज्य सेक्टर की पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन क्षमता से एक तिहाई ही रह जाने की वजह से बिजली संकट गहरा गया है।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय और स्टेट सेक्टर के तहत कुल 28 पनबिजली परियोजनाओं की 2693.45 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है। कड़ाके की ठंड में दरियाओं में नदियों के जल स्तर में भारी गिरावट से 700 से 800 मेगावाट बिजली उत्पादन ही हो पा रहा है।
इसमें से भी केंद्रीय परियोजनाओं में एनएचपीसी की ओर से उत्पादित हो रही करीब आधी बिजली को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जा रहा है। बिजली उपभोक्ता सुधीर गुप्ता का कहना है कि कड़ाके की ठंड में भारी बिजली कटौती हो रही है।
इस वजह से ठंड में न तो गीजर में पानी गर्म हो रहा है और न ही ठीक से ब्लोअर आदि ही चल पाता है। रात के समय तो मोमबत्ती लगाने की जरूरत पड़ जाती है। बिजली अधिकारियों के अनुसार दरियाओं में जल स्तर में भारी गिरावट से पनबिजली परियोजनाओं में उत्पादन गिर गया है। एक तिहाई उत्पादन रह जाने की वजह से जरूरत के अनुसार बिजली कटौती हो रही है।