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अगले महीने बिजली हो सकती है महंगी

Mon, 07 Mar 2016 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू

सार

  • अप्रैल से बिजली उपभोक्ताओं को किराया बढ़ोतरी का झटका लग सकता है।
  • इस साल भी किराया बढ़ोतरी की सिफारिश की फाइल सरकार के पास पहुंच चुकी है।
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विस्तार
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रियासत में अगले वित्त वर्ष के पहले माह अप्रैल से बिजली उपभोक्ताओं को किराया बढ़ोतरी का झटका लग सकता है। घरेलू, व्यवसायिक, इंडस्ट्रियल सभी वर्गों में पांच से दस फीसदी तक किराया बढ़ोतरी हो सकती है। 
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राज्य विद्युत नियामक आयोग इस संबंध में अपनी सिफारिश सरकार को सौंप चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले साल 2015 में पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार ने एक मार्च को शपथ ग्रहण की थी। 

इस वजह से बिजली किराया बढ़ोतरी सरकार ने नहीं की। बिजली घाटे के लगातार बढ़ोतरी के मद्देनजर पिछले साल भी राज्य विद्युत नियामक आयोग (सर्क) ने सरकार से किराया बढ़ोतरी की सिफारिश की हुई थी, लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया।
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इस साल भी किराया बढ़ोतरी की सिफारिश की फाइल सरकार के पास पहुंच चुकी है। ऐसे में राज्यपाल प्रशासन बिजली विभाग पर मार्च 2016 के अंत तक 6949 करोड़ की बिजली खर्च की देनदारी को देखते हुए किराया बढ़ोतरी को मंजूरी प्रदान कर सकता है।

वर्तमान समय में रियासती सरकार को करीब 7.25 रुपये प्रति यूनिट बिजली पड़ रही है और वह सब्सिडी के आधार पर उपभोक्ताओं के विभिन्न वर्गों में बिजली मुहैया करवा रही है। इसमें सबसे ज्यादा सब्सिडी घरेलू उपभोक्ताओं को दी गई है। घरेलू उपभोक्ताओं को 2.34 रुपये प्रति यूनिट बिजली मिल रही है।
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बिजली की हर यूनिट का होगा हिसाब

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सरकारी विभागों में अविवेकपूर्ण तरीके से बिजली खर्च पर नकेल कसने के लिए इन्हें पावर आडिट के दायरे में लाया जाएगा। इसके लिए रियासती सरकार मुख्य सचिव बीआर शर्मा के माध्यम से केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के अधीनस्थ पीएसयू एनर्जी एफिशियेंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) से संपर्क साधे हुए है।

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रियासत के सरकारी विभागों का सालाना बिजली खर्च करोड़ों रुपयों का रहता है। बिजली की बर्बादी को रोकने के लिए भी अभी तक सरकारी विभागों में जरूरी कदम नहीं उठाए जा सके हैं। 

नागरिक सचिवालय से लेकर सभी अहम विभागों को रियासती सरकार पावर आडिट के दायरे में लाना चाहती है, ताकि हर साल करोड़ों रुपये की बिजली बर्बादी को रोका जा सके और बिजली घाटे को कम करने में मदद मिल सके। 

इसके लिए सरकारी विभागों में बिजली बचत के लिए एलईडी लाइटिंग सिस्टम से लेकर फाइव स्टार रेटिंग वाले बिजली उपकरण लगाए जाएंगे। ईईएसएल से अगर पावर आडिट के लिए सरकार की बातचीत ठीक रहती है तो मार्च के आखिरी सप्ताह से पावर आडिट के दायरे में विभागों को लाया जा सकता है। 
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