सर्दियां शुरू होने को हैं और इसके साथ ही बाढ़ पीड़ितों की चिंताएं भी बढ़ना शुरू हो गईं हैं। पीड़ितों का कहना है कि एजेंसियों के बीच तालमेल नहीं होने से कश्मीर घाटी में पुनर्वास का कार्य ढीला है, जिससे उन्हें चिंता सता रही है। भारी संख्या में बाढ़ पीड़ित टेंटों अथवा निर्माणाधीन इमारतों में रह रहे हैं।
बेमिना बाईपास सड़क के पास टेंट में रहने वाले फयाज अहमद भट्ट ने कहा कि हम लोग पीड़ितों के राहत और पुनर्वास को लेकर बहुत कुछ सुन रहे हैं, लेकिन इस अहम मुद्दे पर सरकार गंभीर दिखाई नहीं पड़ती है। भट्ट बटमालू क ा रहने वाला है और पूरा बटमालू शहर झेलम के पानी से बर्बाद हो गया है।
उसने कहा कि सरकार को कम से कम लोगों को लकड़ी, सीजीआई शीट, ईंटें और सीमेंट मुहैया करवाना चाहिये ताकि लोग आने वाली सर्दी से बचने के लिए दोे-दो कमरे खड़े कर सकें। जवाहर नगर के अब्दुल रहमान वानी ने बताया कि उसे नहीं पता है कि उसके घर की क्या स्थिति होगी।
उसके अनुसार, मेरा घर भी पुराना है, पता नहीं बचा होगा या नहीं। वहीं अधिकारी इस बात को भी स्वीकार करते हैं कि पुनर्वास का काम काफी धीमा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिला स्तर पर एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल की कमी है। उन्होंने कहा, ऐसी आपदा में अधिकारियों को हमेशा निर्देशों का इंतजार नहीं करना चाहिये।