अब्दुल माजिद के बच्चे अपने पिता की तस्वीर थामे हुए
- फोटो : मुनीष शर्मा
अब्दुल के खानदान में 30 से 40 लोग कर रहे देश सेवा, भाई ने भी दी है शहादत
हवलदार अब्दुल मजीद के बलिदान होने की खबर ने मजीद के रिश्तेदारों के धीरे-धीरे सूख रहे जख्मों को हरा कर दिया है। इसके चलते छह वर्ष पहले देश के लिए बलिदान होने वाले उसके मौसेरे भाई मोहम्मद नसीर की याद में भी उनके आंसू बहने लगे हैं।
अब्दुल मजीद के मामा सेवानिवृत्त हवलदार मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि आज मजीद के साथ नसीर की शहादत की यादें भी ताजा हो गईं। उसने 2017 में पुंछ के भींबर गली में बलिदान दिया था। हम धीरे-धीरे नसीर का गम भूलने लगे थे। इन शहादतों के गम के साथ हमें अपने बच्चों पर गर्व भी है जो देश के लिए अपना बलिदान देकर सदा के लिए अमर हो गए। मरना तो एक दिन सभी को है। लेकिन, देश के लिए मरने का सौभाग्य किसी-किसी को ही मिलता है। हमारे खानदान के 30 से 40 लोग पुलिस, बीएसएफ व सेना में हैं। हम आगे भी बलिदान देने से पीछे नहीं हटेंगे।
बलिदान बेटे के लिए पिता की आखिरी दुआ
- फोटो : मुनीष शर्मा
राजोरी में कालाकोट क्षेत्र के बाजीमाल में बुधवार को हुई मुठभेड़ में दो खूंखार आतंकियों को मार गिराया गया है। इस गोलीबारी में दो कैप्टटन सहित पांच जवान बलिदान हो गए। इनमें 63 राष्ट्रीय राइफल्स के कैप्टन एमवी प्रांजल (मंगलोर, कर्नाटक), 9 पैरा के कैप्टन शुभम गुप्ता (आगरा), 9 पैरा के हवलदार कमांडो अब्दुल माजिद (अजोट, पुंछ), लांसनायक संजय बिष्ट (हल्ली पादली, नैनीताल उत्तराखंड) व पैराट्रूपर सचिन लौर (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) बलिदान हुए। कैप्टन एमवी प्रांजल, कैप्टन शुभम गुप्ता, लांसनायक संजय बिष्ट व पैराट्रूपर सचिन लौर के पार्थिव शरीर को जम्मू में अंतिम स्लामी दी।
पुंछ के गांव अजोट के हवलदार अब्दुल मजीद अपने पीछे तीन नन्हे बच्चे छोड़ गए। इन बच्चों को इस बात का पता तक नहीं है कि उनके सिर से पिता का साया सदा के लिए उठ गया। घटना से अनजान बड़ा बेटा अब भी सेना में भर्ती होने की बात कहता है।
सुबह से घर में लगी भीड़ और जमा महिलाओं को रोते देख बलिदानी का बड़ा बेटा साहिल (8) बड़ों को देख कभी रोने लगता है, फिर अन्य बच्चों के साथ बातें करने लगता है। लेकिन, छोटे बेटे राहिल (6) और बेटी महिरा (4) को पता ही नहीं कि उनके परिवार पर किस प्रकार का कहर टूटा है।
बेटा ने कहा- मैं भी सेना की वर्दी पहनूंगा
ये दोनों घर में आए रिश्तेदारों के बच्चों के साथ उछल-कूद करते नजर आए। हालांकि, बलिदानी मजीद के बड़े बेटे को भी पूरी तरह पिता के बलिदान का पता नहीं है। लेकिन, यह पूछे जाने पर कि पढ़-लिख कर क्या करने वाला है, तो वह कहता है कि वह सेना में जाएगा। वो भी बड़े होकर सेना की वर्दी पहनेगा। पिता का फोटो थमे साहिल बताता है कि तीन-चार दिन पहले पापा से फोन पर बात हुई थी। उन्होंने अच्छे से पढ़ाई करने को कहा है।