रियासत में पंचायतों का पांच साल का कार्यकाल 17 जुलाई को पूरा होने के पूर्व पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के राज्य पंचायत राज एक्ट में संशोधन बिल 2016 के खिलाफ सियासत गर्मा गई है। पंचों-सरपंचों के प्रमुख संगठन आल जम्मू कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस ने सरकार को चेतावनी दी है कि एक्ट में अलोकतांत्रिक संशोधन को वापस लिए बिना पंचायत चुनाव मंजूर नहीं हाेंगे।
कांफ्रेंस के प्रधान अनिल शर्मा का कहना है कि सरकार ने 73वें संशोधन को लागू करने के बजाय पंचायतों को कमजोर करने के लिए संशोधन किया है। सरपंच का चयन पंचों से किए जाने से भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
इसमें सरकार खासतौर से विधायक और मंत्री का हस्तक्षेप बढ़ेगा और जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश है। शर्मा का कहना है कि लोगों से भी सीधे सरपंच को चुनने का अधिकार सरकार ने छीनकर लोकतंत्र विरोधी काम किया है।
सरकार ने विधानसभा और विधान परिषद में बिल पारित करवाकर पंचायतों को कमजोर करने की कोशिश की है। अगर इसे जल्द वापस नहीं लिया गया तो ब्लाक स्तर से लेकर राज्य स्तर पर आंदोलन होगा।
पंचायत राज एक्ट में संशोधन के खिलाफ जम्मू संभाग के पंचों-सरपंचों को विश्वास में लिया जा चुका है। अब कश्मीर संभाग में विश्वास में लिया जाएगा। इसके बाद आंदोलन की रूपरेखा बनेगी।