प्रशासन को राष्ट्रीय ध्वज ले जाने के लिए सुरक्षाकर्मियों की जरूरत पड़ी है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1949 में आम लोगों के बीच ऐसा किया था। उन्हें सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं पड़ी थी। यह पलटवार पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा पर किया है।
महबूबा मुफ्ती का ट्वीट उप राज्यपाल द्वारा शहर में एक तिरंगा रैली में भाग लेने और उन्हें याद दिलाने के बाद आया है। स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियों के बीच आयोजित रैली में भाग लेते हुए सिन्हा ने पीडीपी अध्यक्ष का स्पष्ट संदर्भ देते हुए कहा है कि जो लोग दावा करते हैं कि जम्मू-कश्मीर में तिरंगा उठाने के लिए कोई नहीं बचेगा, उन्हें रैली में उमड़ी भीड़ देखनी चाहिए।
इस पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 1949 के आसपास लाल चौक पर युवा कश्मीरियों की भीड़ के बीच तिरंगा फहराया था। उन्हें किसी सुरक्षा की जरूरत नहीं थी। अब एलजी प्रशासन उसी राष्ट्रीय ध्वज को लेकर 2023 में सुरक्षा कर्मियों से घिरा हुआ है। बताते चलें कि पीडीपी अध्यक्ष ने 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से पहले कहा था कि यदि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा रद्द कर दिया गया तो यहां राष्ट्रीय ध्वज उठाने वाला कोई नहीं बचेगा।