जम्मू। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नए कृषि कानून को वापस लेने की पीएम की घोषणा स्वागतयोग्य है लेकिन सरकार यह फैसला पहले ले लेती तो सैकड़ों किसानों की जान बच जाती। जब केंद्र ने तीन कृषि कानून बनाए थे तो संसद में चर्चा के दौरान इन्हें सभी ने पारित न करने का दबाव बनाया था, लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी रही। उम्मीद है कि सरकार भविष्य में लोगों के हितों के खिलाफ कानून बनाने से पहले सोचेगी।
आजाद ने कहा कि सरकार जिन लोगों के लिए कानून बनाती है अगर उन्हें ही कानून पसंद नहीं हैं तो ऐसे कानूनों को नहीं लाना चाहिए। नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान एक साल से अधिक समय से सड़कों पर हैं। सैकड़ों किसानों को भीषण सर्दी और गर्मी समेत अन्य परिस्थितियों में जान गंवानी पड़ी, लेकिन सरकार की नींद नहीं खुली। यह कानून वापस लेने का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव भी हैं। कृषि कानूनों के साथ अनुच्छेद 370, 35-ए सहित अन्य कानून वापस लेने के लिए क्या विपक्ष दबाव बनाएगा, इस पर आजाद ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया।
प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी पर आजाद ने खुलकर कहने के बजाय कहा कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है। ऐसे मामलों में पार्टी के भीतर चर्चा की जाती है। पार्टी की अनुशासन मत कमेटी से आजाद को बाहर करने पर उन्होंने कहा कि वह कई वर्षों से कमेटी में थे। इसलिए यह कोई मुद्दा नहीं है। पार्टी में लोकतंत्र है और हरेक को अपनी बात करने का अधिकार है। जम्मू-कश्मीर में उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा देखने के सवाल पर आजाद ने कहा कि लोगों की सोच के बारे में वह कुछ नहीं कह सकते हैं।