कश्मीर में अब पुलिस के कई जवान आतंकी संगठनों में शामिल हो रहे हैं। आतंकी संगठनों द्वारा स्थानीय युवकों की भर्ती का अभियान अभी थमा नहीं है। आतंकी संगठनों की नई रणनीति ने सुरक्षा बलों और केंद्र सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
आतंकी संगठनों के पास बेहद आधुनिक हथियारों की सूचनाओं ने सुरक्षा बलों को चौकन्ना कर दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा बलों को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हरि भाई परथीभाई चौधरी ने स्वीकार किया है कि कुछ पुलिस वाले सरकारी हथियारों के साथ गायब हो गए हैं और उनके आतंकी संगठनों में शामिल होने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि 14 मई, 2013 को एसपीओ प्रताप सिंह एक इनसास रायफल और 20 कारतूस के साथ गायब हुआ। इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। वह सरकारी मैगजीन भी साथ ले गया है।
इसके अलावा 14 अगस्त, 2014 को एसपीओ मोहम्मद शपी डार एक एके 47 रायफल, तीन मैगजीन, और 90 राउंड कारतूस के साथ गायब हुआ। बाद में वह सोपोर से गिरफ्तार कर लिया गया और हथियार भी बरामद कर लिए गए। उसे बर्खास्त कर दिया गया है। उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है।
सरकारी हथियार चुराकर आतंकी संगठन में शामिल हो रहे हैं
सांकेतिक फोटो
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इसके बाद 8 सितंबर, 2015 को गुल मोहम्मेद मंगनू और रियाज अहमद नामक दो एसपीओ हथियार और गोला बारूद के साथ गायब हुए। डोडा में इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज की गई। बाद में 15 अक्तूबर, 2015 को मुठभेड़ में मारा गिराया गया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने कहा कि 27 मार्च, 2015 को दो एक के 47 रायफलों, 3 मैगजीन, और 90 राउंड कारतूस के साथ कांस्टेबल नसीर अहमद गायब हुआ। कोठीबाग में इसकी प्राथमिकी दर्ज हुई है। इस साल 12 जनवरी को 4 एक के 47 रायफलों, 13 मागजीन और 390 राउंड गोली लेकर कांस्टेबल शकूर अहमद फरार हो गया। उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
उसके आतंकी संगठन में शामिल होने की आशंका है। इसी तरह 5 फरवरी, 2016 को एक एके 47 रायफल और 30 चक्र गोलियों के साथ पुलिस फालोवर रियाज अहमद गायब हो गया। दस फरवरी को वह गिरफ्तार कर लिया गया।