जिले के जावेद टाक रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात का हिस्सा बने। बिजबिहाड़ा में 1997 में आतंकी हमले में पांव गंवाने वाले जावेद भले ही व्हील चेयर पर आ गए, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
संघर्ष करते रहे। जावेद ने अपने स्वयंसेवी संगठन के जरिये विकलांगों के कल्याण के लिए काम करना शुरू कर दिया। वे एक स्कूल का भी संचालन कर रहे हैं।
मोदी के मन की बात का हिस्सा बनने के बाद प्रसन्नचित जावेद का कहना है कि हौसला हो तो कुछ भी असंभव नहीं। बिजबिहाड़ा में घर के बाहर किए गए आतंकी हमले में पांव गंवाने के बाद जावेद ने हिम्मत नहीं हारी।
परिवार वालों की मदद से हेल्प लाइन नाम का एक स्वयंसेवी संगठन खड़ा किया। फिर जुट गए बच्चों को पढ़ाने के अभियान में।
पहले इस इलाके के लोग बच्चों को स्कूल नहीं भेजते थे, लेकिन, जावेद के प्रोत्साहन से अब लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू कर दिया है। जावेद कहते हैं कि उनका सपना पुलिस अफसर बनने का था।
रविवार को मोदी के मन की बात का हिस्सा बनने के बाद उन्हें लगा कि उनका सपना पूरा हो गया है। प्रधानमंत्री ने जब उनका नाम लिया तो उन्हें बेहद खुशी हुई और लगा कि उनकी मेहनत रंग लाई है।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। इसके साथ ही सेना, सीआरपीएफ तथा जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी समय-समय पर उनकी मदद करती रहती है।