गई। यह योजना खरीफ सीजन 2016 से लागू होगी। प्राकृतिक आपदा-बारिश, ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा, बीमारियों तथा अन्य कारणों से फसलों का नुकसान होने की स्थिति में किसानों तथा कृषि उत्पादकों को योजना के तहत भरपाई हो सकेगी।
किसानों को खरीफ फसल के लिए 2 फीसदी और रबी के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम देना होगा। हार्टिकल्चर तथा कामर्शियल फसलों के लिए 5 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना होगा। शेष प्रीमियम का भुगतान केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से समान रूप से 50:50 अनुपात में किया जाएगा। योजना को राज्य सरकार चरणबद्ध तरीके से लागू करेगी। वर्ष 2016-17 में 10 फीसदी कृषि क्षेत्र इस योजना के तहत कवर होगा।
यह योजना ऋण लेने वाले किसानों (केसीसी) के लिए अनिवार्य तथा अन्य के लिए वैकल्पिक होगी। अगले दो से तीन साल में सभी किसानों को इस योजना के तहत कवर किया जाएगा। आटोमेटिक वेदर स्टेशन तथा क्राप कटिंग एक्सपेरिमेंट्स के आधार पर किसानों को मौसम की समय-समय पर जानकारी दी जाएगी।
रियासत में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) को लागू किए जाने की मंजूरी मिल गई है। वीरवार को राज्यपाल एनएन वोहरा की अध्यक्षता में हुई राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी राज्य सरकार की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति फसलों तथा कवर किए जा रहे क्षेत्रों की अधिसूचना फसल सीजन के अनुसार जारी करेगी।
एसएसी ने कृषि उत्पादन विभाग को खरीफ सीजन 2016-17 से इस योजना को लागू करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार करने तथा इसी के अनुरूप शेड्यूल जारी करने को कहा है। किसानों को अधिकाधिक लाभ के लिए योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने की भी हिदायत दी गई है।
लखनपुर और ठंडीखुई में टोल वसूलने को मंजूरी
टोल प्लाजा
- फोटो : Demo Pic.
राज्य के विभिन्न टोल प्लाजा केंद्रों पर टोल प्लाजा की दर एक समान करने के लिए राज्य प्रशासनिक परिषद (एसएसी) ने पीडब्ल्यूडी को केंद्रीय परिवहन मंत्रालय तथा एनएचएआई से लगातार संपर्क कर इस दिशा में समाधान के लिए प्रयास करने को कहा है। इसके साथ ही एनएचएआई को लखनपुर और ठंडीखुई में नेशनल हाईवे फी रूल्स 2008 के तहत टोल कलेक्शन की प्रक्रिया शुरू करने का भी फैसला किया गया। ठंडीखुई में टोल कलेक्शन शुरू करने के लिए कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी प्रकार की सहायता दी जाएगी। यह फैसला हाईवे के बेहतर रख-रखाव की दृष्टि से किया गया है।
सोसाइटी रजिस्ट्रएशन एक्ट में संशोधन
रियासत में कुकरमुत्तों की तरह पनप रहे एनजीओ पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से जम्मू-कश्मीर सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन किया गया है। एसएसी ने जम्मू-कश्मीर सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन संशोधन अधिनियम 2016 को मंजूरी दी। इसके तहत यदि कोई एनजीओ अन्य गतिविधियों, जिसके लिए वह पंजीकृत है से इतर कोई कार्य करते हुए पाया गया तो उसका पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। इसके साथ ही ऐसी गतिविधियां जिससे राज्य की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था के लिए खतरा हो, चार्टर्ड एकाउंटेट की ओर से सालाना एकाउंट की आडिट न हो तब भी पंजीकरण रद्द कर दिया जाएगा। सोसाइटी के गैर पंजीकृत होने का आदेश तब तक जारी नहीं किया जाएगा जब तक कि उससे नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण न ले लिया जाए। आदेश के खिलाफ एक महीने के भीतर सरकार के समक्ष अपील की जा सकती है। एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की ओर से प्रस्तावित किया गया था।