कश्मीर घाटी को एक बार फिर से हिंसा की आग में झोंकने की साजिश की जा रही है। अलगाववादियों के बंद के आह्वान को दरकिनार कर सुचारु कामकाज शुरू करने के प्रयासों को बौखलाए उपद्रवियों द्वारा भय और दहशत से दबाने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। स्कूल फूंके जा रहे हैं।
मंत्रियों के आवास और दुकानों पर हमले किए जा रहे हैं। सड़क पर चलने वाले सार्वजनिक वाहनों को फूंका जा रहा है ताकि लोगों में दहशत रहे। बंद के कैलेंडर का पूरी तरह से पालन हो।
सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इस बात के इनपुट मिल रहे हैं कि घाटी में अलगाववादियों के बंद के आह्वान से लोग आजिज आ चुके हैं। अब वे जल्द से जल्द सामान्य स्थिति की बहाली चाहते हैं, ताकि स्कूल-कालेज खुल सकें। कारोबार शुरू हो सके। पर्यटन उद्योग फिर से गुलजार हो सके। लोगों को रोजी रोजगार मिल सके।
अमन पसंद लोग इनके लिए खलनायक बनते नजर आ रहे हैं। ऐसे में फिर से दहशत का माहौल बनाने के लिए लगातार हमले किए जा रहे हैं। ऐसे लोग चाहते हैं कि फिर से सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाए और किसी भी कीमत पर हिंसा की आग थमने न पाए।