हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि कोई शख्स राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होता है और सीमा सुरक्षा बल में तैनाती के दौरान वह जेएंडके पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत गिरफ्तार किया जाता है तो वह फोर्स में नियमित रूप से काम करने का अधिकार नहीं रखता।
उक्त फैसला मुनीर हुसैन की याचिका पर सुनाया गया, जिसने अवैध रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप में उसके खिलाफ फैसले को चुनौती दी थी। पीएसए के तहत गिरफ्तार होने के कारण याचिकाकर्ता ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो पाया था। उसकी ओर से गिरफ्तारी के आदेश को चुनौती नहीं दी गई और बंदी की अवधि पूरी होने के बाद रिहा हुआ।
चीफ जस्टिस ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने वाला शख्स यदि पीएसए के तहत बंदी बनाया गया तो वह बीएसएफ जैसी अनुशासित फोर्स में ड्यूटी करने का पात्र नहीं हो सकता। क्योंकि देश की अखंडता ज्यादा महत्वपूर्ण है।