मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की ओर से शनिवार को बुलाई गई बैठक से फिर दो सांसद गायब रहे। सांसद तारिक हमीद कर्रा तथा मुजफ्फर हुसैन बेग दोनों बैठक में शामिल नहीं हुए। कर्रा ने मतभेदों को लेकर आवाज दबाने तथा चापलूसी को बढ़ावा देने का पार्टी पर आरोप लगाया।
कहा कि मुख्यमंत्री को सात नवंबर को पद छोड़ देना चाहिए था जब पाकिस्तान से बातचीत शुरू करने की उनकी मांग को श्रीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से ठुकरा दिया था। एक बार जब उन्होंने यह मुद्दा उठाया और उसे प्रधानमंत्री ने ठुकरा दिया तो उन्हें तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए था।
कर्रा ने कहा कि बैठक में शामिल होने का क्या मतलब है जब नेतृत्व उनकी बात सुनने को ही तैयार नहीं है। मतभेद संबंधी आवाज को दबाया जा रहा है। डा. फारूक अब्दुल्ला को हराने वाले कर्रा ने कहा कि पार्टी में चापलूसी की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
चुनाव के दौरान जब वे लोग जनता के बीच गए तो कहा कि नेकां कार्यकाल में उत्पीड़न हो रहा है, लेकिन साल भर बाद भी इस स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। अब वे लोग जनता का सामना कैसे करें। भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर कहा कि उनका इस मुद्दे में बिल्कुल स्पष्ट मत है।
यह कश्मीर की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखकर नहीं किया गया। पीडीपी ने भाजपा के साथ गठबंधन के लिए अपने कोर एजेंडे को पीछे धकेल दिया। अफस्पा को हटाना, पावर प्रोजेक्ट्स की वापसी तथा सेल्फ रूल पीडीपी के कोर एजेंडे है, लेकिन इसे पीछे छोड़ दिया गया है।