कश्मीर में इन दिनों प्रवासी पक्षियों की गूंज है। सेंट्रल एशिया और यूरोप से करीब चार लाख प्रवासी पक्षियों ने कश्मीर के विभिन्न तराई क्षेत्रों में दस्तक दी है।
हालांकि आने वाले वर्षों में इनको रहने के लिए कोई जगह नहीं मिलेगी, क्योंकि जिस तरह से तराई क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ रहा है, गंदगी डाली जा रही है और ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, इससे इन पक्षियों के पास यहां रुकने का कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा।
ब्रह्मी बतख, टफटेड बतख, गड़चाल, गारगेने, ग्रे गूज, मालार्ड, कामन मरगेनसर, नार्दर्न पिंटेल, कामन पोचार्ड, फरगुनीज पोचार्ड, रेड क्रेस्टड पोचार्ड, रडी शेल्डक, नार्दर्न शावलर, कामन टील आदि प्रजाति के पक्षी इन दिनों कश्मीर में हैं।
रंग-बिरंगे पक्षियों से तराई क्षेत्रों की रौनक देखते ही बनती है। नवंबर महीने के पहले सप्ताह में यह पक्षी कश्मीर में आते हैं।
दरअसल, साइबेरिया, चीन, जापान और अन्य देशों से आने वाले इन पक्षियों को कश्मीर में इन दिनों अपने देश के जैसा वातावरण मिलता है। इसलिए यह यहां पहुंचते हैं।
करीब चार लाख पक्षी कश्मीर में रिकार्ड किए गए हैं। वन्यजीव विभाग के वार्डन रउफ जरगर का कहना है कि तराई क्षेत्रों की खस्ताहाल का असर प्रवासी पक्षियों के आगमन पर भी पड़ रहा है।