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मरीज से 15 मिनट की मुलाकात को लगेंगे 100 रुपए

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अगर आप श्रीनगर के स्किम्स में शाम छह बजे के बाद जाने की सोच रहें, तो एक बात जरूर सुनिश्चित कर लें कि आपकी जेब में कम से कम 100 रुपये जरूर हो। इस संबंध में स्किम्स प्रबंधन ने फैसला लिया है। हैरानी की बात यह है कि यह टिकट केवल 15 मिनट के लिए ही है।
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सूत्रों के अनुसार यह कदम पैसा बनाने के लिए उठाया गया है। स्किम्स प्रबंधन द्वारा लिए गए इस फैसले ने सबको चौंका दिया है, चाहे वह किसी मरीज के अटेंडेंट हों या फिर अस्पताल के कर्मचारी।

अस्पताल के एक कर्मचारी आसिफ (बदला हुआ नाम) के अनुसार जिस तरह से टिकट पर लिखा गया है कि सफाई रखने में सहयोग दें, उससे उन्हें लगता नहीं कि ऐसे कदम उठाने से सफाई रह पाएगी।
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उन्होंने कहा कि लाखों लोग दिन के समय आते हैं, क्या उनसे प्रदूषित नहीं होता अस्पताल। उनके अनुसार इस फैसले से गरीब लोगों पर मार पड़ेगी।

प्रबंधन दे रहा अपनी सफाई

प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल में या तो केवल सेमिनार आयोजित किए जाते हैं या गरीबों से पैसा बटोरा जाता है। जिस दिन सही से ऑडिट होगा तब इनका भांडा फूटेगा। स्किम्स के एक और कर्मचारी असलम (बदला हुआ नाम) के अनुसार यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है।

उन्होंने कहा कि टिकट पर कई गलतियां देखी जा सकती हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि फैसला जल्दी में लिया गया है और तुरंत इन्हें छापा गया है। इतना ही नहीं, इस स्पेशल एंट्री पास पर कहीं नहीं लिखा गया है कि यह टिकट केवल छह बजे के बाद वालों के लिए है।

इस फैसले को लेकर स्किम्स के निदेशक डॉ शौकत जरगर का कहना है कि उन्हें लगता है कि 15 मिनट के लिए 100 रुपये लेने से अस्पताल में साफ-सफाई रखने में मदद मिलेगी।
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रोज होती है चार लाख की कमाई

उन्होंने यहां तक कह डाला कि शाम छह बजे के बाद कौन सा कोई गरीब अस्पताल आता है। वहीं इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इस पर गौर करने का आश्वासन हेल्थ एंड मेडिकल एजुकेशन मंत्री चौधरी लाल सिंह ने दिया है।

गौरतलब है कि पीडीपी के जड्डिबल से विधायक अंसारी द्वारा भी कुछ समय पहले स्किम्स प्रबंधन पर लोगों के जख्मों पर नमक लगाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

उन्होंने कहा था कि स्किम्स में रोजाना मरीजों से ईसीजी, एक्स-रे, टेस्ट, आदि के जरिये करीबन चार लाख रुपये कमाए जाते हैं, लेकिन अस्पताल के विकास के साथ साथ मरीजों की भलाई के लिए एक फूटी कौड़ी भी खर्च नहीं की जाती।
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