राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल अलगाववादी नेता मसर्रत आलम को बडगाम के हुमहामा पुलिस स्टेशन से सेंट्रल जेल (कोट भलवाल, जम्मू) भेजा दिया गया। उसके खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) लगाया गया है। 47 वर्षीय मसर्रत आलम पर पहले ही आरपीसी की धारा 121-ए (देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने), 124 (देशद्रोह) और 147 (दंगा फैलाने) के तहत केस चल रहा है।
पीएसए के तहत किसी व्यक्ति को बिना कोर्ट में पेश किए दो साल तक न्यायिक हिरासत में रखा जा सकता है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मसर्रत को बडगाम से जम्मू जेल भेजने की बात स्वीकार की है। उल्लेखनीय है कि लंबे समय के बाद जेल से रिहा होने के बाद मसर्रत ने हैदरपोरा में रैली कर पाकिस्तानी झंडे लहराने और गलत नारेबाजी की थी।
टीवी फुटेज में स्पष्ट हुआ कि मसर्रत कई लोगों के घेरे में चल रहा था, जो पाकिस्तानी झंडे लहरा रहे थे। इसके अलावा वह भारत विरोधी और पाकिस्तान समर्थन नारे लगा रहे थे।
ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई थी सरकार
मसर्रत को 18 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद 25 अप्रैल तक उसे पुलिस कस्टडी में भेजा गया था। वीरवार सुबह से ही मसर्रत को कोट भलवाल लाने की चर्चा रही। मीडिया टीमें सुबह से ही जेल के बाहर डटी हुईं थीं। लेकिन शाम लगभग पांच बजे कड़ी सुरक्षा के बीच मसर्रत को लेकर पहुंचे वाहन को सीधा जेल के अंदर ले जाया गया।
सीजेएम अदालत में मसर्रत द्वारा दायर की गई बेल याचिका में 25 अप्रैल को अंतिम फैसला आना था, लेकिन पीएसए लगाने से अब उसकी रिहाई की संभावना कम हो गई है।
मसर्रत के वकील शब्बीर अहमद भट ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि सीजेएम अदालत बडगाम में मसर्रत की रिहाई को लेकर चल रहे मामले में बुधवार को सरकार अपनी ओर से ठोस सबूत पेश करने में विफल रही और उम्मीद यह लगाई जा रही थी कि शनिवार को उन्हें अदालत की ओर से जमानत मिल जाएगी।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन पर पीएसए लगाया है और अब उनकी रिहाई संभव नहीं।
दिल्ली से आया था आदेश?
वहीं मुस्लिम लीग के जनरल सेक्रेटरी अब्दुल अहद पर्रा का कहना है कि मसर्रत आलम को बडगाम जिले के हुमहामा पुलिस थाने में रखा गया था। जब वीरवार सुबह वह उनसे मिलने वहां गए, तो उन्हें वहां नहीं पाकर वह हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि वहां मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें जानकारी दी कि मसर्रत को सुबह ढाई बजे कहीं ले जाया गया।
पर्रा के अनुसार बाद में उन्हें कहीं से यह जानकारी मिली कि मसर्रत पर पीएसए लगाते हुए उन्हें जम्मू की कोट भलवाल जेल भेजा गया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार मसर्रत पर पीएसए लगाने का आदेश दिल्ली से आया था।
बताया जाता है कि केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा एक बार फिर मुफ्ती सरकार की लगाम कसते हुए उन्हें मसर्रत पर कड़ा एक्शन लेने को कहा है। मिली जानकारी के अनुसार डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट बडगाम ने बुधवार देर रात मसर्रत पर पीएसए लगाने की मंज़ूरी दे दी थी।
यहां जानिए, कौन है मसर्रत आलम?
वर्ष 1971 में श्रीनगर के जैनादार मोहल्ला में एक मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे मसर्रत ने कश्मीर के पुराने मिशनरी स्कूल टीनडेल बिस्को से आरंभिक शिक्षा प्राप्त की। श्री प्रताप कालेज श्रीनगर से स्नातक की। 1989 में हुए सशस्त्र संघर्ष का समर्थक होने के कारण उसे 1990 में वह पहली बार गिरफ्तार हुआ और 1996 तक सलाखों के पीछे रहा।
2010 की गर्मियों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया, जिसमें 117 लोगों की मौत हुई थी। उसकी गिरफ्तारी से पहले सूचना देने वाले को दस लाख रुपये ईनाम देने की घोषणा की गई थी। पीएसए के तहत मसर्रत आलम तीन बार गिरफ्तार हुआ। रियासत में पीडीपी-भाजपा की सरकार बनते ही उसे रिहा किया गया था।
उसकी रिहाई का भाजपा और विपक्षी दलों ने विरोध किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में संसद में उसकी रिहाई पर रोष जताया था। हुर्रियत कांफ्रेंस के एक वर्ग मुस्लिम लीग के चीफ मसर्रत को हुर्रियत प्रमुख सैयद अली शाह गिलानी के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। मसर्रत पत्थरबाजों का सरगना भी है और वह खुद स्वीकार करता है कि बचपन से वह पत्थरबाजी करता रहा है।