जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में मरीजों को सुबह डाइट में नि:शुल्क मिलने वाले नाश्ते पर ग्रहण लग गया है। ठेकेदारों ने डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान न करने पर नाश्ता देना बंद कर दिया है। मरीजों को नाश्ते में आधा लीटर दूध, चीनी का पाउच और चार पीस ब्रेड नहीं मिल पाएंगे। इससे एसोसिएटेड अस्पतालों में जीएमसी, एसएमजीएस, सीडी, साइक्रेटरी और सुपर स्पेशलिटी में रोजाना 1100-1200 मरीज प्रभावित होंगे। मरीजों के दोपहर और रात की डाइट पर भी संकट के बादल मंडला रहे हैं।
डाइट के लिए सबसे ज्यादा जीएमसी पर बकाया है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जीएमसी प्रशासन ने तीस लाख रुपये से अधिक राशि जारी की। लेकिन दूध का ही करीब 42 लाख रुपये बकाया होने से फैक्ट्री मालिक ने दूध की सप्लाई देना बंद कर दिया है। इसके लिए फैक्ट्री वाले को कुछ लाख रुपये देने पर भी बात नहीं बनी। इसके बाद एसएमजीएस, सीडी, साइकेटरी और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर भी लाखों रुपये की देनदारी है।
नाश्ते के बाद मरीजों को दोपहर की डाइट में एक दाल, सब्जी, चार चपाती, चावल और रात को चावल, चार चपाती और एक सब्जी दी जाती है। हफ्ते में दो दिन पनीर की सब्जी भी दी जाती है। इसमें औसतन प्रति मरीज पर एक दिन की डाइट पर साठ रुपये खर्च आता है। ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान न होने के कारण नाश्ते को बंद करना उनकी मजबूरी है। बाजार का कर्ज बढ़ जाने के साथ कर्मचारियों को नियमित वेतन देना भी मुश्किल हो रहा है।
बिना कैंटीन वाले अस्पतालों में दिक्कतें ज्यादा
डाइट सेवा में नाश्ते पर ग्रहण लगने से बिना कैंटीन के चल रहे अस्पतालों में मरीजों को ज्यादा दिक्कतें झेलनी पड़ेंगी। इसमें सुपर स्पेशलिटी, सीडी, साइकेटरी अस्पताल शामिल हैं। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में छह यूनिट चल रहे हैं। यहां रोजाना दर्जनों मरीजों की सर्जरी हो रही है। इंडोर वार्ड भी चल रहे हैं। लेकिन कैंटीन की कोई सुविधा नहीं है। सीडी अस्पताल में भी कई इंडोर वार्डों में बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज चलता है।
नोटिसों को गंभीरता से नहीं लिया गया
जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में डाइट की देनदारी का दबाव लगातार बढ़ने से ठेकेदारों की ओर से जीएमसी प्रशासन को कई बार नोटिस जारी करने के बावजूद दिलचस्पी नहीं दिखाई गई। अक्तूबर 2014 में ही दो बार नोटिस जारी किए गए। जिसके बाद तीन नवंबर 2014 को ठेकेदारों ने एक दिन डाइट सेवा बंद रखी थी। इसके बाद मई 2015 में दोबारा नोटिस देकर पंद्रह दिन का समय दिया गया। लेकिन पूरा भुगतान न करने पर ठेकेदारों ने प्रथम चरण में नाश्ता बंद कर दिया है।
फिलहाल कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं: अधीक्षक
जीएमसी सहित एसोसिएटेड अस्पतालों में डाइट में नाश्ते की सुविधा पर ग्रहण लगने के बाद जीएमसी प्रशासन ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार, कुछ फंड जारी किए गए हैं। जबकि अन्य राशि के लिए संबंधित कमेटी को सूचित किया गया है। ठेकेदारों से भी डाइट जारी रखने की अपील की गई है। फिलहाल डाइट के लिए अभी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।