जीएमसी की इमरजेंसी से सटे चोपड़ा नर्सिंग होम में शुक्रवार की देर शाम को डाक्टर और तीमारदार भिड़ गए। बात बहस से बढ़कर मारपीट तक पहुंच गई। डाक्टरों और तीमारदारों के बीच जमकर मारपीट हुई। दो लोग जख्मी भी हुए हैं। पिटाई से गुस्साए पीजी डाक्टरों ने हड़ताल कर दी। कई घंटों तक हड़ताल से मरीज भटकते रहे। जीएमसी में कई घंटे तक तनाव की स्थिति बनी रही। हंगामे के बाद स्टाफ ने हड़ताल कर दी। बाद में सीनियर डाक्टरों को बुलाकर काम चलाया गया। मामले में आरोपी अटेंडेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है।
जीएमसी चौकी इंचार्ज ने घटनाक्रम की जानकारी उच्चाधिकारियों की दी। एसपी सिटी श्रीराम और एसपी नार्थ एसकेएस चौहान, एसएचओ दिलीप सिंह मौके पर पहुंचे और युवकों को काबू कर लिया। डाक्टरों की शिकायत पर दोनों के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल दोनों युवक पुलिस की हिरासत में बताए जा रहे हैं। युवकों ने भी डाक्टरों पर मारपीट करने का पर्चा लगाने के लिए शिकायत दर्ज करवाई है। हालांकि, उनकी शिकायत पर देर रात तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की थी।
मारपीट के गुस्साए पीजी डाक्टरों द्वारा इलाज नही करने पर मरीज और उनके तीमारदार बाहर आना शुरू हो गए। तीमारदार कभी सीएमओ तो कभी एसएचओ के पास तक जाकर इलाज शुरू करने की मांग करते रहे, लेकिन नौ बजे तक स्थिति वैसे की तैसी बनी रही। लोगों के बार बार कहने पर सीएमओ ने सीनियर डाक्टरों को बुलाया और इलाज शुरू करवाया।
इसी बीच कुछ लोग हड़ताल की बात सुनकर इमरजेंसी के अंदर ही नहीं गए और बाहर से लौट गए। पुलिस, सुरक्षा कर्मियों के अलावा मरीजों तथा तीमारदारों की भीड़ गेट पर जुटी रही। देर रात तक गवर्नमेंट मेडिकल कालेज अस्पताल के प्रिंसिपल, सीएमओ तथा डाक्टरों की बैठक चलती रही।
डाक्टर ने जांच से किया था मना: युवक
युवकों का आरोप है कि वह स्वाइन फ्लू की जांच करवाने के लिए नर्सिंग होम आए थे, यहां कमरे में डाक्टर सो रहा था। उन्होंने उन्हें जांच करने के लिए कहा, तो डाक्टर ने समय नहीं होने की बात कही। तब दोनों युवकों ने उसे ऐसा नहीं कहने के लिए कहा। इसके बाद बहस शुरू हो गई। युवकों का आरोप है कि डाक्टर ने उन्हें कमरे से बाहर निकल जाने के लिए कहते हुए पहले धक्का मारा था।