जीएमसी में मंगलवार को सियासी नेताओं और अस्पताल प्रशासन को पाक गोलाबारी के घायलों के तीमारदारों का विरोध झेलना पड़ा। उन्होंने कहा कि गोलाबारी का कोई स्थायी हल नहीं निकाला जा रहा है। वे लगातार पाक गोलाबारी का शिकार हो रहे हैं।
सरकार ने पुराने वादों पर भी कुछ नहीं किया है। चिकित्सा में देरी मिलने पर भी तीमारदार भड़के। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप करने से घायलों को चिकित्सा सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं। इस बीच पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, सांसद सीताराम येचुरी आदि घायलों का हालचाल जानने पहुंचे।
जीएमसी के अधीक्षक डा. रविंद्र रतनपाल के अनुसार घायलों को सभी चिकित्सा सुविधाएं नि:शुल्क दी जा रही हैं। जीएमसी में सुबह मंगलवार उस समय तनावपूर्ण स्थिति हो गई, जब कुछ डाक्टरों द्वारा बाहर से दवाई लाने को कहा।
तीमारदारों ने कहा कि एक तो वे पहले ही पाक गोलाबारी की मार झेल रहे हैं, उस पर उन्हें दवाइयों के लिए भी बाहर भेजा जा रहा है। तीमारदार नरेंद्र, सोनू ने कहा कि गोलाबारी के बाद विस्थापित होकर घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचने पर उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है। ऐसे में सरकार की पीड़ितों को सभी उचित सुविधाएं मुहैया करवाना जिम्मेदारी बनती है।
उन्होंने कहा कि पहले भी गोलाबारी के बाद पीड़ितों को पांच मरले का प्लाट देने की घोषणाएं की गईं लेकिन अब तक कुछ नहीं हो पाया है। तीन घायलों को सिटी एनजीओ ग्राफी के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भेजना पड़ा।