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ओजीडब्ल्यू हैं आतंकवादियों से बड़ी चुनौती, इंसानों के बीच रह रहे हैं 6000 से अधिक अमन के दुश्मन

Sat, 28 Sep 2019 10:04 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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ओवर ग्राउंड वर्कर जिसे संक्षेप में ओजीडब्ल्यू कहा जाता है। ये आम लोगों की तरह रहकर आतंकियों के लिए काम करते हैं। किसी आतंकवादी घटना को अंजाम देने के लिए ये ओजीडब्ल्यू आतंकवादियों के लिए जमीन तैयार करते हैं। यह आतंकियों तक सुरक्षाबलों की सूचनाएं पहुंचाने के साथ ही उनके लिए हथियार, पैसा और सुरक्षित ठिकाने का बंदोबस्त करते हैं। आतंकवादियों के साथ ही ये ओजीडब्ल्यू सेना के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं।

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सुरक्षाबलों के भारी दवाब के चलते आतंकी और उनके मददगार ओवर ग्राउंड वर्कर छिपे हुए हैं। सुरक्षाबलों ने ऐसी रणनीति बनाई है कि आम लोगों के साथ उनका संपर्क ही न होने पाए। इसके चलते पथराव की घटनाएं भी कम हुई हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के पास मौजूद इनपुट के अनुसार, घाटी में फिलहाल 300 आतंकी सक्रिय हैं। ओजीडब्ल्यू की संख्या छह हजार से अधिक है। यह ओजीडब्ल्यू ही आतंकियों को मदद पहुंचाने के साथ घाटी में हिंसा और पत्थरबाजी को भी बढ़ावा देते हैं।

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पाकिस्तान में बैठे आतंकी ने पंजाब के तरनतरान में ड्रोन से हथियार भिजवाए थे

हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की गिरफ्त में आए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ओवर ग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) से पूछताछ में बड़े खुलासे हुए हैं। पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी आशिक नेंगरू ने ही पंजाब के तरनतरान में ड्रोन से हथियार भिजवाए थे। कुछ हथियारों को नेंगरू के भतीजे इम्तियाज खान द्वारा पहले जम्मू फिर कश्मीर पहुंचाना था। इसी बीच गुरुवार को इम्तियाज एसओजी के हत्थे चढ़ गया।

आशिक नेंगरू कश्मीर के पुलवामा निवासी है। वह झज्जर कोटली सहित कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। अब वह पंजाब और कश्मीर में बड़े हमले करने की फिराक में है। लखनपुर से पकड़े गए आतंकियों के तार भी उससे जुड़े बताए जा रहे हैं।

गुरुवार को एसओजी ने जम्मू के बाड़ी ब्राह्मणा, रामबन, बनिहाल और शोपियां से सात लोगों को पकड़ा था, जिनमें से चार को छोड़ दिया गया है। तीन को रिमांड पर लिया गया है। उनसे पूछताछ में पता चला है कि तीनों ओवर ग्राउंड वर्कर हैं, जिन्हें जैश ने जम्मू में रेकी करने भेजा था। इन्हें जम्मू व आसपास के इलाकों में हाइड आउट बनाने का काम भी दिया गया था।
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