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J&K: कश्मीर में बर्फबारी के बाद संकट पर विधानसभा से विपक्ष का वॉकआउट

Mon, 30 Jan 2017 09:01 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला/जम्मू
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जम्मू कश्मीर विधानसभा में हंगामा - फोटो : AMAR UJALA
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जम्मू कश्मीर राज्य विधानसभा में विपक्ष ने कश्मीर में बर्फबारी के बाद उत्पन्न संकट से निपटने में सरकार की विफलता के विरोध में वॉकआउट किया। विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। विपक्ष ने कार्य स्थगन का प्रस्ताव लाकर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की थी। इस मांग को मंजूर नहीं किए जाने के बाद विपक्षी सदस्यों का गुस्सा भड़का।
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सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेशनल कांफ्रेंस की ओर से कार्य स्थगन प्रस्ताव लाया गया। विपक्षी सदस्य कश्मीर के अलावा रियासत के अन्य पहाड़ी क्षेत्रों की दिक्कतों पर चर्चा चाहते थे। नेकां के अली मोहम्मद सागर ने कहा कि सरकार सड़कों से बर्फ हटाने में नाकाम रही है। बिजली संकट बढ़ गया है।

पेयजल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। नेकां के देवेंद्र राणा ने कहा कि जम्मू के पहाड़ी इलाकों में भी हालत बेहद खराब है। आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस के विकार रसूल ने रामबन क्षेत्र की समस्याएं गिनाईं।
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स्पीकर ने की प्रश्नकाल को चलने देने की अपील

जम्मू कश्मीर विधानसभा के स्पीकर कविंद्र गुप्ता - फोटो : FILE PHOTO
स्पीकर कवींद्र गुप्ता ने कहा कि इस मुद्दे को सदन में दो-तीन बार उठाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि सदस्य इसे अनुदान मांगों की चर्चा के दौरान उठा सकते हैं। स्पीकर ने प्रश्नकाल को चलने देने की अपील की। इससे नेकां और कांग्रेस के सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। 

विपक्षी सदस्य वेल में आकर नारे लगाने लगे। संसदीय कार्य मंत्री अब्दुल रहमान वीरी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि सरकार इस मामले पर पहले ही उत्तर दे चुकी है और अब विपक्ष को यह मुद्दा बार-बार नहीं उठाना चाहिए।

बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए नेकां विधायक देवेंद्र राणा ने कहा कि सिर्फ कश्मीर ही नहीं, जम्मू के इलाके भी बर्फबारी से प्रभावित हुए हैं। जनजीवन अस्त-व्यस्त है। सड़कें बंद हैं। लोग फंसे हुए हैं। उन्हें राशन-पानी की दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। स्थिति से निपटने के सरकार के गंभीर प्रयास धरातल पर कहीं नजर नहीं आते। 
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