आतंकी घुसपैठ के बाद जैसे ही भारतीय सरहद में दाखिल होते हैं उनके इंतजार में पहले से ही तैनात जवान गोलियों से उनका स्वागत करते हैं। इस साल की उड़ी और हलमतपोरा घुसपैठ की कोशिशों पर नजर डाले तो जवानों ने उन्हें एलओसी के निकट ही घेर कर उनका काम तमाम कर दिया।
जेके पुलिस का अहम योगदान
आतंकियों के सफाये में जेके पुलिस का अहम योगदान रहा है। साल 2017 में आतंकियों के खात्मे के लिए चलाए गए ऑपरेशन आल आउट में जम्मू कश्मीर पुलिस के एसओजी के जवानों ने हिस्सा बने।
सेना, पुलिस और सीआरपीएफ जवानों द्वारा संयुक्त हो कर किए गए एनकाउंटर में 200 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया गया। इसके लिए डीजीपी एसपी वैद और एडीजीपी मुनीर खान की जोड़ी की काफी तारीफ हुई थी।
खुफिया तंत्र के बदौलत मिल रही कामयाबी
सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस के खुफिया तंत्र घाटी के साथ ही नियंत्रण रेखा के आसपास के इलाकों में भी बेहद सक्त्रिस्य है। यही कारण है कि आतंकियों को खोज-खोज कर मार गिराया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक हलमतपोरा मुठभेड़ भी खुफिया इनपुट के कारण ही सफल रहा था, जिसके बाद हिजबुल ने पोस्टर जारी करके मुखबिरों को धमकी दी है।