रियासत में लोकतांत्रिक सरकार के गठन में देरी और वर्तमान वित्तीय वर्ष समाप्ति की ओर होने के कारण सोमवार को राज्यपाल की ओर से लेखानुदान पेश किया जाएगा। हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोमवार सुबह 10:30 बजे लेखानुदान पेश किए जाने की पूरी तैयारी है। लेखानुदान कम अवधि के लिए ही होगा। रियासत में सरकार गठन के बाद नए वित्त मंत्री बजट पेश करेंगे।
जानकारों की मानें तो लेखानुदान में फिलहाल पुराने बजट पर ही ध्यान केंद्रित कर उसमें कुछ फेरबदल किया गया है। राज्यपाल ने लेखानुदान को मार्च के प्रथम सप्ताह में ही मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद इसे प्रिंटिंग के लिए भेज दिया गया था। जम्मू-कश्मीर संविधान के अनुसार राज्यपाल शासन के पहले छह माह में गवर्नर के पास लेखानुदान पेश करने के विधायी और कार्यपालिका अधिकार हैं।
यदि राज्यपाल शासन छह माह से ज्यादा हो जाता है तो यह राष्ट्रपति शासन में तब्दील हो जाएगा और विधायी अधिकार संसद के पास चले जाएंगे। जानकारों का कहना है कि लेखानुदान में उद्यमियों और व्यापारियों को टैक्स में किसी तरह की राहत अभी मिलने की उम्मीद नहीं है।
वर्तमान में जिन आइटमों पर टैक्स की अलग-अलग दरें हैं, वह लेखानुदान में बरकरार रखे जाने की संभावना है। कुछ आइटमों पर पड़ोसी राज्यों से टैक्स में विभिन्नता को दूर करने के लिए पिछले कुछ वर्षों से व्यापारी लगातार प्री बजट मीटिंग में प्रयासरत रहे हैं, लेकिन हर साल पुरानी दरों को ही आगे बरकरार रखा गया।
पिछले दो साल से जीएसटी लागू होने की कवायद के कारण भी इन दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था, क्योंकि गुड्स एंड सर्विस जीएसटी में देश के तमाम राज्यों में आइटमों पर खुद-ब-खुद एकरूपता आ जाएगी।
लेखानुदान बनाने की प्रक्रिया में रियासत के उद्यमियों और व्यापारियों को बातचीत के लिए राज्यपाल की ओर से न्योता दिया गया था, जिसमें उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे।
व्यापारियों ने ‘इज आफ डुइंग बिजनेस’ रियासत में लागू करने की बात कही थी। इसके अलावा ‘तैयार माल में वैट छूट’ और ‘कच्चे माल पर बिना नकद वैट’ को बढ़ाने पर भी विचार हुआ है। 31 मार्च को यह छूट समाप्त हो रही है। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि इसे आगे भी जारी रखने की कवायद की जाएगी।