जब भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का रास्ता ही बंद हो गया तो फिर सीमाओं पर हो रही गोलाबारी को बंद करने की बात कैसे होगी। यह विचार मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में प्रकट किए।
वह छानापोरा में एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से रूबरू हो रहे थे। उमर ने कहा कि ऐसा लगता है कि अच्छे दिनों की जगह सीमाओं पर रहने वालों के बुरे दिन आ गए हैं।
उमर ने पाकिस्तान द्वारा भारतीय नागरिक ठिकानों पर की जा रही अकारण गोलाबारी पर नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि इसे तुरंत बंद किया जाना चाहिए। गोलाबारी के कारण दो लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।
'बढ़ती जा रही है पाकिस्तान की जद'
मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के कई ठिकानों पर भारी गोलाबारी हो रही है, जिससे बड़ी संख्या में लोग घरों को छोड़ कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है।
गोलाबारी के कारण बड़ी संख्या में मवेशी मारे गए हैं अथवा घायल हुए हैं, जबकि गोलाबारी थमने की जगह बढ़ती ही जा रही है।
पहले गोलीबारी सीमा सुरक्षा बल के मोर्चों तक ही सीमित थी, लेकिन अब भयावह रूप धारण करते हुए नागरिक ठिकानों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
'विदेश सचिवों की बातचीत रूकना गंभीर मसला'
मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच विदेश सचिवों की बातचीत रुक जाना एक गंभीर मसला है। उन्होंने नई दिल्ली तथा इस्लामाबाद से बातचीत की प्रक्रिया फिर शुरू करने के रास्ते तलाशने के लिए कहा।
उमर ने कहा कि कि देश के अन्य भागों में रहने वाले लोगों की तरह सीमाओं पर बसी जनता भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अच्छे दिनों की उम्मीद कर रही थी, लेकिन लगता है कि सीमाओं पर रहने वालों के लिए अच्छे दिनों के स्थान पर बहुत ही बुरे दिन आ गए हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अच्छे दिन लाने के लिए काम करने के लिए कहा, ताकि सीमाओं पर रहने वाले भी चैन से जिंदगी बसर कर सकें।