पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के लिए न्यायपालिका का इस्तेमाल कर सकती है। जो लोग ऐसा सोचते हैं कि भाजपा ने अनुच्छेद 370 पर यथा स्थिति की बात मान ली है, वे गलत हैं। भाजपा को पता चल गया है कि विधायिका के जरिये अनुच्छेद 370 को छेड़ना संभव नहीं है।
उन्होंने चेताया कि यह मुद्दा भविष्य के लिए परेशानियां खड़ी कर सकता है। अनुच्छेद 35 ए का मुकदमा भी अगर सरफेसी एक्ट की तरह लड़ा गया तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि यह भविष्य में बड़ा मुद्दा बन जाएगा। करोड़ों रुपये भवनों की मरम्मत और निर्माण पर खर्च होते हैं तो अच्छे वकील पर लाखों रुपये खर्च करने की जरूरत है।
अगर संविधान के अनुच्छेद 35 ए पर रियासत सरकार ने ठीक से कानूनी लड़ाई नहीं लड़ी तो रियासत के विशेष दर्जे और स्टेट सब्जेक्ट पर खतरा पैदा हो जाएगा। विधानसभा में अनुदान मांगों पर चर्चा के क्रम में उमर ने सरकार पर तीखे हमले किए। उमर ने कहा कि भाजपा और पीडीपी की सरकार एजेंडा आफ एलायंस नहीं बल्कि अजित डोभाल के डाक्टरीन पर काम कर रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने कश्मीर में हालात से निपटने के जिस सिद्धांत को पेश किया है, महबूबा सरकार उसी का पालन कर रहीं हैं।
हिंसा की न्यायिक जांच नहीं कराने के फैसले पर भी सवाल
विधानसभा में बोलते उमर अब्दुल्ला
- फोटो : AMAR UJALA
मुख्यमंत्री द्वारा स्थानीय आतंकियों को मुठभेड़ में नहीं मारने पर टिप्पणी करते हुए उमर ने पूछा कि सरकार के पास कौन सी तकनीक है जिससे वह पता लगाएगी कि घेरा गया आतंकी स्थानीय है या विदेशी।उमर ने कहा कि अगर सरकार के पास वो तकनीक है तो उप मुख्यमंत्री ने क्यों कहा कि आतंकी बुरहान वानी गलती से मारा गया।
महबूबा भी कहती रहीं हैं कि अगर सरकार को पता होता तो बुरहान वानी को मरने नहीं दिया जाता। क्या मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश देने से पहले यूनिफाइड कमांड में इसके बारे में चर्चा की? एक ओर ऐसी बातें होती हैं और दूसरी ओर बुरहान को मारने वालों को मेडल भी दिया जाता है। हालांकि, वह इस मुद्दे पर दोहरी बातें भी करती रहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कई जगह यह भी कहा कि वह आतंकी था और आतंकी मुठभेड़ में मारे ही जाते हैं। उमर ने कश्मीर हिंसा की न्यायिक जांच नहीं कराने के फैसले पर भी सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री महबूबा को बधाई दी
विधानसभा में बोलते उमर अब्दुल्ला
- फोटो : AMAR UJALA
उन्होंने कहा कि महबूबा जब विपक्ष में थीं तब कहती थीं कि पुलिस अपने ही खिलाफ जांच करे तो भरोसा कैसे किया जा सकता है। अब उनका एक्शन पिछले स्टैंड से उलट है। महबूबा की आतंकियों के प्रति नरमी वाली छवि बदलीपूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री महबूबा को बधाई दी कि उन्होंने अपनी स्थापित छवि बदली है।
महबूबा को पहले अलगाववादियों और आतंकियों के प्रति नरम माना जाता था, लेकिन, 2016 में जितने आतंकी मारे गए पहले कभी नहीं मारे गए थे। उन्होंने हालात बिगड़ने के लिए केंद्र और रियासत सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
उमर ने भाजपा की खामोशी पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि 2016 में सुरक्षा बलों के जवान भी अब तक किसी भी साल से अधिक मारे गए। पहले सुरक्षा बलों की शहादत पर मुख्यमंत्री के पुतले जलाए जाते थे, अब भाजपा खामोश क्यों है। सेना के हर कैंप पर आतंकी हमला हुआ है। इसके लिए केंद्र और रियासत सरकार कसूरवार हैं।