फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नए आपराधिक कानूनों पर बोले उमर अब्दुल्ला- दुरुपयोग की संभावनाएं ज्यादा, NDA के घटक दल करें पुनर्विचार

Mon, 01 Jul 2024 05:59 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला डिजिटल डेस्क, जम्मू कश्मीर

सार

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर एनडीए के घटक दलों को पुनर्विचार करना चाहिए।
विज्ञापन
उमर अब्दुल्ला - फोटो : एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि आज से लागू किए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के दुरुपयोग की संभावनाएं ज्यादा है। उन्होंने उम्मीद थी कि इंडिया की सरकार बनने पर इन पर फिर से विचार किया जाना था। लेकिन भाजपा की भी सरकार नहीं बन पाई है। इस समय में देश में एनडीए की सरकार है। ऐसे में एनडीए के घटक दलों को इन कानूनों पर एक बार फिर विचार करना चाहिए। 

विज्ञापन


उमर ने कहा, वैसे तो कोई भी कानून अपने आप खराब नहीं होता है। उसे किस तरह से इस्तेमाल किया जाता खराबी उसमें है। आज से लागू किए गए तीन कानूनों के गलत इस्तेमाल की गुंजाइश ज्यादा है। वैसे भी इस सरकार को जब भी मौका मिलता है तो वो कानून का दुरुपयोग करती है।'  

उन्होंने कहा कि नेकां हमेशा से इन कानूनों को लेकर आशंकित रही है। हमने शुरू से ही इन कानूनों को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त की हैं। ये मानव निर्मित कानून हैं और इन्हें बदला जा सकता है। इनकी समीक्षा की जानी चाहिए। 
विज्ञापन


इंजीनियर रशीद को शपथ की इजाजत पर बोले उमर

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इंजीनियर रशीद को एनआईए की तरफ से शपथ लेने के लिए सहमति मिल गई है। लेकिन वह अभी रिहा नहीं हो रहे हैं। ऐसे में वह शपथ तो ले लेंगे लेकिन बारामुला के लोगों को उनका प्रतिनिधि नहीं मिल पाएगा। रशीद जनता के बीच जाकर काम नहीं कर पाएंगे।

उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'एनआईए ने शपथ ग्रहण की अनुमति दे दी है और अब वह स्पीकर के कक्ष में शपथ लेंगे। अफसोस की बात यह है कि बारामुला लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को अभी भी अपना प्रतिनिधि नहीं मिलेगा क्योंकि उन्हें शपथ लेने की अनुमति तो दे दी गई है लेकिन वह लोगों के प्रतिनिधि के तौर पर काम नहीं कर पाएंगे।'

सोमवार को देश में तीन नए आपराधिक कानून- भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) लागू किए गए हैं। नए कानूनों ने क्रमशः ब्रिटिश काल की भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली है।   

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें