जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में घाटी में हुई नागरिकों की हत्या पर चिंता व्यक्त करते हुए बुधवार को कहा कि घाटी में हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है और प्रशासन से लोगों को सुरक्षा देने को कहा। उन्होंने कहा कि इस साल केंद्र शासित प्रदेश में अलग-अलग धर्मों के 28 नागरिकों की आतंकी हमलों में जान गई है।
उन्होंने कहा कि हम सभी को यह सुनिश्चित करने के लिए अपने स्तर पर पूरी कोशिश करनी चाहिए कि हम कश्मीर से अल्पसंख्यकों का एक नया पलायन न देखें। उन्होंने कहा कि इस समय किसी भी समुदाय के लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए और समुदायों में सुरक्षा की भावना को बहाल करने के लिए जो कुछ भी किया जा सकता है, वह किया जाना चाहिए।
अब्दुल्ला ने हाल के हमलों को एक खुफिया विफलता करार देने से परहेज करते हुए कहा कि मुझे लगता है कि यह खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करने में विफलता है। यह एक विफलता है जिसके लिए पुलिस को दोष नहीं दिया जा सकता। पुलिस द्वारा तो लगातार आतंकवाद विरोधी अभियान आयोजित किए जाते हैं।
स्थानीय लोगों के विभिन्न आतंकी समूहों में शामिल होने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके बारे में सरकार और राजनीतिक दलों को चिंतित होना चाहिए। अब्दुल्ला ने इस साल 24 जून को दिल की दूरी और दिल्ली की दूरी (दिल्ली और श्रीनगर के बीच की दूरी को दूर करने) को हटाने के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर बात की और सुझाव दिया कि अगर हम इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाते हैं तो यह हम उग्रवाद कम करने में काफी हद तक सक्षम होंगे।