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क्या उमर अब्दुल्ला को सता रहा अपनी हार का डर?

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लोकसभा चुनाव में वादी की सभी तीन सीटों पर मिली हार से नेशनल कांफ्रेंस का मनोबल बुरी तरह से लड़खड़ा गया है। पार्टी के संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला भी श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र चुनाव से हार गए। वे इससे पहले कभी चुनाव नहीं हारे थे।
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उनकी इस हार के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा थी कि विधानसभा चुनाव में उमर को पार्टी किसी सेफ सीट से ही चुनाव लड़ाएगी। शुक्रवार को ऐसी चर्चाओं को सही साबित करते हुए पार्टी ने उमर अब्दुल्ला को अब्दुल्ला परिवार की पारिवारिक सीट गांदरबल से चुनाव न लड़ाकर नेशनल कांफ्रेंस की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सोनवार और वीरवाह सीट से चुनाव लड़ाने का फैसला किया है।

उल्लेखनीय है कि 1977 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि अब्दुल्ला परिवार ने गांदरबल सीट छोड़ दी हो। पार्टी के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और उनके बाद उनके पुत्र एवं पार्टी संरक्षक फारूक अब्दुल्ला गांदरबल से चुनाव लड़ते रहे।
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12 साल पहले गांदरबल में हार चुके हैं उमर

इससे पूर्व 2002 में नेशनल कांफ्रेंस की ओर से गांदरबल से उमर अब्दुल्ला को प्रत्याशी बनाया गया। लेकिन गांदरबल में अब्दुल्ला परिवार को 22 साल बाद पहली हार का मुंह देखना पड़ा था। पीडीपी के काजी मोहम्मद अफजल ने उमर को 2870 वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर किया।

वहीं इस साल हुए लोकसभा चुनाव में भी पीडीपी को इस विधानसभा क्षेत्र से 2913 मतों की लीड मिली थी। माना जा रहा है कि गांदरबल सीट से पीडीपी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री काजी मोहम्मद अफजल से चुनाव में हार के डर से ही उमर अब्दुल्ला ने पारिवारिक सीट की बजाय सेफ सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

लोकसभा चुनाव में हार के बाद कश्मीर में पार्टी का जनाधार कम होने के चलते सोनवार नेशनल कांफ्रेंस की सबसे सुरक्षित सीट होने के बावजूद उमर की यहां से जीत सुनिश्चित नहीं होने की आशंका के चलते उन्हें वीरवाह सीट से भी चुनाव लड़ाया जा रहा है।
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उमर के सीट बदलने पर विपक्षियों ने साधा निशाना

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के परंपरागत गांदरबल सीट को छोड़ सोनवार और बीरवाह सीट से चुनाव मैदान में उतरने पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद जुगल किशोर शर्मा का कहना है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सियासी हालात को समझ चुके हैं। इस वजह से वे इधर उधर भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर इस बार कश्मीर में जोरदार तरीके से चलेगी और इस आंधी में कई बड़े नाम भी उड़ेंगे।

उनका कहना है कि पारंपरिक सीट को छोड़कर स्वयं मुख्यमंत्री एवं नेशनल कांफ्रेंस के कार्र्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के सोनवार और बीरवाह सीट से उम्मीदवार बनने से साफ है कि उन्हें समझ आ चुका है कि इस बार समय उनके अनुकूल नहीं है।

पैंथर्स पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया का कहना है कि राज्य की मौजूदा नेकां कांग्रेस गठबंधन सरकार से जनता किस कदर नाराज है, इसका अंदाजा इसी से हो जाता है कि मुख्यमंत्री भी अपनी परंपरागत सीट से चुनाव नहीं लड़ रहे। हार की आशंका के चलते ही वे पुश्तैनी सीट को छोड़ दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। सीट बदलना सब बयां कर रहा है।
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