वैष्णो देवी के दरबार में आने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी। अब वे बारिश और ठंड के बीच आराम से अटका आरती के लिए बैठ सकेंगे। प्राकृतिक पुरानी गुफा के बाहर अटका आरती स्थल को टफन ग्लास (गाड़ियों पर लगा ग्लास) से कवर किया जा रहा है। इससे आरती स्थल के चारों ओर की बाउंड्री कवर होने पर उसके भीतर एक समय 350 श्रद्धालुओं के बैठने की क्षमता होगी। अभी बारिश के दौरान यह संख्या घटकर 150 तक रह जाती है।
त्रिकुटा पहाड़ियों में सफेद चादर बिछने और सर्दियों में अटका आरती स्थल पर काफी ठंड रहती है। आरती स्थल के चारों ओर से खुले होने के कारण ठंडी हवा के साथ बारिश का पानी भीतर आ जाता है, जिससे श्रद्धालुओं को कई बार आरती के बीच से उठना पड़ता है। श्रद्धालुओं की इस समस्या को ध्यान में रखते हुए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से आरती स्थल को टफन ग्लास से कवर किया जा रहा है।
1000 रुपये है आरती में शामिल होने की फीस
अटका आरती में प्रत्येक यात्री से एक हजार रुपये लिए जाते हैं। यह प्रात: 6 से 8 बजे और सायंकाल में 6 से 8 बजे तक दो-दो घंटे होती है। वैष्णो देवी में पहुंचने वाले यात्रियों की एक बड़ी संख्या अटका आरती में बैठती है। वर्ष 2018 में वैष्णो देवी के दरबार में यात्रियों ने पांच साल का रिकार्ड तोड़ा था। पिछले साल करीब 85 लाख भक्तों ने पवित्र पिंडियों के दर्शन किए थे। पिछले साल के अंत में यात्रियों के लिए 85 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए भवन-भैरो घाटी रोपवे सुविधा को शुरू किया गया। उसी साल के 80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित वैकल्पिक यात्रा मार्ग ताराकोट मार्ग को शुरू किया गया। इसे सात साल में तैयार किया गया। यात्रियों को राउंड द क्लॉक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं।