पुलवामा में मारा गया आतंकी नूर बेशक तीन फुट का था, लेकिन जैश-ए-मोहम्मद के लिए वह चाणक्य था। उसके पास सुरक्षाबलों की पूरी जानकारियां थीं। यहां तक कि राज्य पुलिस प्रमुख के चैंबर तक की जानकारी तक उसके पास मौजूद थी।
इस लिहाज से उसका जिंदा रहना सुरक्षाबलों के लिए चिंता का विषय था। सूत्रों का कहना है कि नूर त्राली जम्मू कश्मीर पुलिस के लिए भी मुखबिरी का काम कर चुका है। इसलिए उसकी तलाश तेजी से की जा रही थी।
नूर के पास डीजीपी चैंबर, आईजी कश्मीर के चैंबर, पुलिस मुख्यालय, सरकारी दफ्तरों की जानकारी, सेना की अलग-अलग रेजीमेंट की जानकारी, दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों के ठिकानों की जानकारी थी। नूर पुलिस को आतंकियों की सूचना देता था, लेकिन पुलिस की जानकारियां भी आतंकियों तक पहुंचाता था।
कहीं बनाया न हो नक्शा
नूर के पास पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की इतनी जानकारियां थीं कि सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि उसने कहीं एक नक्शा बनाकर जैश-ए-मोहम्मद को न दिया हो। इस नक्शे के आधार पर जैश कई हमलों को अंजाम दे सकता है।
यदि यह नक्शा नहीं बना तो नूर के जिंदा रहने पर वह ऐसा कर सकता था। फिलहाल दोनों ही पहलुओं पर मंथन किया जा रहा है।