डा. रितू शर्मा ने अपने पति के खिलाफ चीफ ज्यूडीशियल मैजिस्ट्रेट के सामने शिकायत पेश की थी, जिन्होंने मामले की जांच दोमाना थाने को सौंपी। शिकायत के अनुसार डा. रितू शर्मा का विवाह सुदर्शन शर्मा के साथ 16 फरवरी 2003 को हुआ। उनके दो बच्चे भी हैं।
आरोपी अपने पेश के अलावा कुछ बिजनेस करने के लिए पीड़िता से अकसर रुपये की मांग करता रहा। इस दौरान शिकायतकर्ता अपने वैवाहिक जीवन को बचाने के लिए पति की क्रूरता भी सहती रही। समय बीतने के साथ आरोपी की मांग बढ़ती गई और उसका अपनी पत्नी के प्रति रवैया कठोर होता गया। पति अकसर पत्नी को ताने कसता रहा और शराब के नशे में शारीरिक क्रूरता करता रहा।
शिकायत के अनुसार 20 जुलाई 2014 को शिकायतकर्ता उदयवाला स्थित अपने रिश्तेदार के घर किसी के उठाले में गई थी। शाम लगभग 5.30 बजे आरोपी भी वहां पहुंच गया और पत्नी के साथ गाली गलौज करने लगा। पत्नी ने जब उसे रोका और कहा कि वहां अभद्र भाषा का प्रयोग कर बिना वजह रिश्तेदारों के समक्ष ड्रामा न करे।
इस पर आरोपी उग्र हो गया और उसने उसे पीटना शुरू कर दिया। वह पत्नी पर मुक्के से वार करने के अलावा उसे बालों से पकड़ खींचता रहा। मौके पर उपस्थित रिश्तेदारों ने बीच-बचाव किया। इस पर आरोपी उसे धमकी देने लगा कि यदि उसने उसे तीन लाख रुपये नहीं दिए तो वह उसे खत्म कर देगा।
वर्तमान में पीड़ित अपने दोनों बच्चों के साथ मां के घर में रह रही है। उसने शिकायत में अपनी जान को खतरा बताया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरपीसी की धारा 498-ए, 323 के तहत मामला दर्ज कर लिया। प्रथम सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि आरोपी अग्रिम जमानत का गलत इस्तेमाल कर सकता है।
वह न तो जांच के समय मौजूद हो रहा है और न ही पुलिस को सहयोग कर रहा है। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया। जेएनएफ