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NHPC ने जम्मू कश्मीर में दो प्रोजेक्ट्स से हाथ खींचे

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जल संपदा की धनी रियासत का माहौल नेशनल हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन को नागवार गुजरने लगा है। बिजली निर्माण के अपने नेशनल मैप में जम्मू-कश्मीर को प्राथमिकता से देखती आ रही एनएचपीसी अब अपना फोकस रियासत से हटाकर अन्य राज्यों की तरफ करने की तैयारी में है।
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राज्य में विचाराधीन दो प्रस्तावित प्रोजेक्टों से एनएचपीसी ने हाथ खींच लिए हैं और खबर है कि एनएचपीसी ने जम्मू-कश्मीर के बजाय अब बिजली उत्पादन के लिए सिक्किम राज्य में दिलचस्पी बढ़ा दी है।

एनएचपीसी के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हाल के वर्षों में राजनीतिक हलकों से एनएचपीसी से बिजली परियोजनाएं वापस लेने की मांग मुखर हुई है।
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इसके अलावा पानी इस्तेमाल पर भारी-भरकम टैक्स लगाने और बिजली इस्तेमाल के बावजूद देनदारी न चुकाने के पहलुओं पर एनएचपीसी प्रबंधन ने लगातार समीक्षा करने के बाद नई प्रस्तावित परियोजनाओं से अपने हाथ खींच लिए हैं।
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जम्मू-कश्मीर के बजाय सिक्किम पर हुआ फोकस

एनएचपीसी द्वारा संचालित डुलहस्ती प्रोजेक्ट के लिए दूसरे चरण और उड़ी स्टेज एक के दूसरे चरण को विकसित करने की योजना थी। इसके लिए एनएचपीसी ने बाकायदा अध्ययन कर मसौदा तैयार कर लिया था, लेकिन रियासत में सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने की वजह से उक्त दोनों योजनाओं पर एनएचपीसी ने विराम लगा दिया है।

सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में केवल किशनगंगा प्रोजेक्ट पर ही काम चल रहा है, जबकि अब निकट भविष्य में एनएचपीसी किसी नए प्रस्ताव को तैयार करने और हाथ में लेने के मूड में नहीं है।

नाम न छापने की शर्त पर एनएचपीसी के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य के सात प्रोजेक्टों सहित एनएचपीसी के देश भर में 18 पावर प्रोजेक्ट हैं। जम्मू-कश्मीर में ज्यादा संभावना के चलते इसे प्राथमिकता से लिया जा रहा था, लेकिन अब सिक्किम राज्य पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

बिजली उत्पादन के लिहाज से जम्मू कश्मीर में 20 हजार मेगावाट क्षमता की पहचान की जा चुकी है। यह आंकड़ा देश की अग्रणी श्रेणी में शुमार है। सिक्किम में बिजली उत्पादन क्षमता की पहचान का आंकड़ा 8 हजार मेगावाट का है।
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