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भीख मांगकर पूरे कर रहे महंगे शौक

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जहां बच्चों से भीख मंगवाने वाले गिरोह शहर में सक्रिय हैं, जो बच्चों से भीख मंगवाकर दिन भर के जमा पैसे शाम को ले लेते हैं, वहीं कई भीख मांगने वाले बच्चों और इनके मां-बाप ने महंगे शोक पाल रखे हैं। फास्ट फूड खाना, मोबाइल चलाना और सिनेमाघरों में फिल्में देखना भिखारियों के शौक हैं।
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चोरी करने पर लोग अपने घरों से निकाल देते हैं तो भीख मांगने के लिए आ जाते हैं। ऐसा खुद भीख मांगने वाले बच्चों ने बताया। दिनभर भीख मांग कर शाम को यह लोग पूरी मौज मस्ती करते हैं। साथ ही इन पैसों का जुआ भी चलता है।

शहर के ग्रीन बेल्ट एरिया में करीब सौ भिखारी सुबह होते ही पहुंच जाते हैं, क्योंकि यह शहर का पॉश इलाका है। यहां भीख मांगने पर बच्चों को दिन भर में 200 से 500 रुपये बन जाते हैं। इसमें से वह फास्ट फूड का मजा लेते हैं। मोबाइल का मजा लेते हैं और फिल्म भी देखते हैं।
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शौक यहां खत्म नहीं होता। बच्चे हैं तो ताश के पत्तों का पता नहीं चल पाता। इसलिए छोटे छोटे कागज के टुकड़े लेकर उनको जुए में इस्तेमाल किया जाता है। माचिस की डब्बी के दोनों साइड के हिस्सों को ताश के पत्तों की तरह इस्तेमाल किया जाता है और बच्चे इससे जुआ खेलते हैं।
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मां बाप कर रहे मौज मस्ती

बच्चों से भीख मंगवा कर मां-बाप मौज-मस्ती करते हैं। शहर के छन्नी रामा में रहने वाले इन बच्चों के मां-बाप शाम को चिकन और शराब का जमकर सेवन करते हैं। साथ ही जुआ भी खेला जाता है।

ग्रीन बेल्ट पार्क में भीख मांगने वाले बच्चों ने बताया कि वह लोगों के घरों में काम तो करते हैं, लेकिन चोरी के इलजाम में उन्हें निकाल दिया जाता है।

हकीकत तो यह है कि इन बच्चों और मां-बाप ने अपने शोक के लिए लोगों के घरों में काम करना तो शुरू किया है, लेकिन वहां चोरियां कर अपने शोक पूरा करने से बाज नहीं आते।
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