रियासत में कुल 12.70 लाख परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) जारी हुए हैं, लेकिन इनमें से मात्र 84,420 पैन धारक ही आयकर रिटर्न भरते हैं। यानी जारी पैन के मुकाबले आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है, लेकिन अब पैन धारकों को आयकर रिटर्न भरनी होगी।
जेएंडके आयकर की नई प्रिंसिपल कमिश्नर संगीता गुप्ता का कहना है कि लोग आयकर रिटर्न को लेकर जागरूक नहीं है। विभाग लोगों को रिटर्न की अनिवार्यता और उसके लाभ से अवगत करवाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग रिटर्न भरें।
देशभर में सवा सौ करोड़ से ज्यादा आबादी है, लेकिन तीन से सवा तीन करोड़ लोग ही आयकर रिटर्न भरते हैं। प्रधानमंत्री के निर्देश पर देशभर में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या बढ़ाने की कवायद चल रही है।
रियासत में एक लाख रिटर्न भरने वालों में नए लोगों को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए आयकर रिटर्न भरने वालों को विभाग हर तरह से मदद करेगा। प्रिंसिपल कमिश्नर ने स्वीकार किया कि कई लोग रिटर्न भरने में लापरवाही करते हैं।
खासकर जेएंडके में कुछ सरकारी अफसर तक रिटर्न नहीं भरते हैं। ऐसे लोगों को हर हाल में रिटर्न भरना होगा अन्यथा उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। रिटर्न भरने वाले आयकर कार्यालय में आकर आयकर सेवा केंद्र का लाभ उठा सकते हैं।
पिछले साल रियासत में बाढ़ आने के कारण अपना लक्ष्य हासिल करने में असफल रहने वाले जेएंडके आयकर सर्किल के लिए राहत की बात है कि सेंट्रल बोर्ड आफ डायरेक्ट टैक्सेज ने इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य घटा दिया है।
संगीता गुप्ता ने कहा कि बोर्ड ने रियासत के हालात को देखते हुए इस साल के लिए 866.59 करोड़ लक्ष्य तय किया है और उम्मीद है कि विभाग इसे हासिल करने में सफल होगा।