इसे शोषण की इंतहा की कहा जा सकता है। राज्य में स्कूली शिक्षा विभाग के गठन के साथ ही बच्चों को पानी पिलाने की सुविधा आधी सदी बाद शोषण की शायद सबसे बड़ी नजीर बन गई है।
इस काम में तैनात की गई महिला वर्करों को मेहनताने के एवज में आज भी रोज का एक रुपया देने का प्रावधान है। और तो और मेहनताने की राशि का भुगतान कभी कुछ महीनों के बाद तो कई बार साल के बाद एकमुश्त किया जाता है।
शिक्षा विभाग के अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जम्मू संभाग के दस जिलों में 1795 कांटिजेंट पेड वर्कर तैनात की गई थीं। इनकी नियुक्ति राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग के गठन के साथ ही कर दी गई।
आठ वर्ष बाद जम्मू संभाग से एक भी नियुक्ति नहीं
आधी सदी से अधिक समय से मौजूद इन पदों पर सीपीडब्ल्यू वर्कर्स पीढ़ी दर पीढ़ी काम करती आ रही हैं, लेकिन मेहनताने का मामला दशकों बाद भी रोज के एक रुपये पर ही अटका है। वाटर एंड मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के संस्थापक ओम प्रकाश खजूरिया और यूनियन अध्यक्ष रानी देवी सीपीडब्ल्यू मामले को शोषण का सबसे बड़ा उदाहरण बताते हैं।
उन्होंने बताया कि लंबे संघर्ष के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में एसआरओ 308 बनाया, जिसमें सीपीडब्ल्यू को चतुर्थ श्रेणी मुलाजिमों की भर्ती में पचास फीसदी आरक्षण दिया जाना है। आठ वर्ष बाद जम्मू संभाग से एक भी नियुक्ति नहीं की गई है।
सरकारी स्कूलों में पानी पिलाने वाली इन महिलाओं में किसी की दूसरी तो किसी की तीसरी पीढ़ी गुजरने के बावजूद हालात जस के तस हैं। कठुआ की मढ़ीन तहसील के एक स्कूल में रानी देवी पंद्रह साल से कांटींजेंट पेड वर्कर है। उससे पहले उसकी सास ने दशकों स्कूल को पानी मुहैया करवाया।
28 वर्ष से स्कूल में माई का काम कर रही रामो
सिद्दड़ा की रहने वाली रामो देवी ने बीस रुपये तनख्वाह में अपना पूरा जीवन सरकारी मिडिल स्कूल सिदद्ड़ा में बच्चों की सेवा करने में समर्पित कर दिया। उन्होंने हार नहीं मानी और स्कूल के बाद घर आकर अन्य कामकाज के जरिए जीवन बसर कर रही हैं।
1987 से रामो देवी ने सरकारी मिडिल स्कूल में साफ-सफाई का काम शुरू किया था। पहले तो अध्यापकों की ओर से इकट्ठा करके बीस रुपये तक दे दिए जाते थे, फिर वही पैसे वेतन के रूप में मिलने लगे। रामो देवी सिद्दड़ा में एक कच्चे मकान में रह रही हैं।
28 साल तक स्कूल की सेवा के दौरान एक दफा उन्हें भी अच्छा वेतन मिलने की उम्मीद जगी, लेकिन सरकारी औपचारिकताओं और किसी अधिकारी की ओर से कोई रुचि नहीं दिखाने पर उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। मौजूदा समय में रामो देवी स्कूल में इस उम्मीद से साफ-सफाई और पानी पिलाकर अपनी सेवाएं दे रही हैं, कि कभी तो उसकी सुनवाई होगी।