भले ही केंद्र सरकार के आंकड़ों में महंगाई दर शून्य से भी नीचे पहुंच चुकी है, लेकिन अभी भी आम लोगों को इससे राहत नहीं मिली है। चाहे वह खाद्य पदार्थ हों या फिर सब्जियां और अन्य सामान। प्रधानमंत्री मोदी के राज में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में कमी आई है, लेकिन इसका असर खाने पीने के सामान पर नहीं पड़ा है। महिलाओं के किचन का बजट बिगड़ गया है। यही कारण है कि आज भी आम लोगों को महंगाई डायन खाए जा रही है।
व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें तो कम हुईं, लेकिन माल किराया वैसा का वैसा ही है। ऊपर से कुछ खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण उसे देश में पूरा नहीं किया जा पा रहा है। सरकार अन्य देशों से दाल, राजमा और अन्य खाद्य पदार्थ मंगवा रही है।
महंगाई का आलम यह है कि होलसेल मंडियों में पिछले माह के मुकाबले इस बार दालों की कीमतें 8-10 रुपये किलो बढ़ गई हैं। डेढ़ माह पहले बिकने वाला खाद्य तेल लगभग सौ रुपये टीन (15 किलो) बढ़ चुका है। हालांकि, होलसेल बाजार में चावल की कीमतें लुढ़की हैं, लेकिन रिटेल मार्केट में कीमतों में कमी नहीं आई है।
यही कारण है कि रिटेल दुकानदार चांदी लूट रहे हैं, जबकि आम उपभोक्ता अभी भी इससे वंचित है। चावल के एक होलसेल व्यापारी का कहना है कि डेढ़ माह पहले जो रेट थे, उसमें 35-40 फीसदी कीमतें गिरी हैं, लेकिन रिटेल मार्केट में इसका असर नहीं देखने को मिल रहा।
होलसेल मंडी के खाद्य पदार्थों का आंकलन
खाद्य पदार्थ पिछले माह वर्तमान
दाल चना 35-36 रुपये 45-46 रुपये
माह दाल 50-60 रुपये 58-70 रुपये
मूंगी साबुत 80-82 रुपये 97-98 रुपये
अरहर दाल 75-82 रुपये 85-92 रुपये
राजमा 110-120 रुपये 120-128 रुपये
तेल 1420-1470 रुपये 1550-1600 रुपये