जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि नशीली दवाओं का इस्तेमाल रोकने के लिए पुख्ता नीति जरूरी है। इस समस्या को गंभीरता से पहचान कर इसके समाधान के प्रयास होने चाहिए।
मुख्यमंत्री युवाओं में बढ़ रहे नशीली दवाओं के सेवन के मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में संयुक्त राष्ट्र के ड्रग एंड क्राइम कार्यालय की टीम ने भी इस विषय पर पावर प्वाइंट प्रजेंटेंशन दी।
उमर अब्दुल्ला का कहना था कि सभी सिविल सोसायटी समेत सभी संबंधित पक्षों को समन्वय के साथ एक छत के नीचे युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने के लिए प्रयास तेज करने होंगे।
'अब और इंतजार नहीं कर सकते'
उमर ने कहा कि इस समस्या से ग्रस्त युवाओं की काउंसिलिंग के साथ उनका बाकायदा उपचार होना चाहिए। उन्होंने बैठक में मौजूद आला अफसरों को इस संबंध में एक पुख्ता नीति बनाने की हिदायत दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम इस समस्या के समाधान के लिए अब और इंतजार नहीं कर सकते अन्यथा यह समस्या विकराल रूप धारण कर लेगी।
उन्होंने इस संबंध में जागरूकता अभियान शुरू करने और गैर सरकारी संगठनों का सहयोग लेने की हिदायत भी संबंधित महकमों के अफसरों को दी।
जम्मू-कश्मीर के साथ है संयुक्त राष्ट्र की टीम
संयुक्त राष्ट्र के ड्रग एंड क्राइम कार्यालय की टीम ने इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार को मदद की पेशकश भी की। यह टीम तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर काम करेगी।
इसमें नारमेटिव वर्क, तकनीकी सहायता और शोध नीति पर आधारित विश्लेषण शामिल है। बैठक में मौजूद राज्य पुलिस महानिदेशक के राजेंद्रा ने बताया कि राज्य में ड्रग सेवन करने वाले पांच हजार से अधिक लोगों को पुनर्वास केंद्रों में उपचार किया गया।
बैठक में स्वास्थ्य एवं मेडिकल एजूकेशन मंत्री ताज मोहिउद्दीन, पशुपाल राज्यमंत्री नजीस गुरैजी, गृह राज्यमंत्री सज्जाद किचलू, गृह विभाग के सचिव सुरेश कुमार आदि विशेष रूप से मौजूद थे।