जम्मू में विभिन्न राजनीतिक दलों और संभाग के तमाम जिलों के हालात जानने के बाद चुनाव आयुक्त विनोद जुत्शी ने वीरवार को कश्मीर की नब्ज टटोली। चुनाव आयुक्त से मिले नेकां और पीडीपी के प्रतिनिधिमंडलों ने भी विधानसभा कराने को लेकर जुत्शी से राय साझा की।
नेकां ने फिलहाल राहत और पुनर्वास कार्य को प्राथमिकता देने की बात कहते हुए चुनाव टालने की राय पेश की जबकि पीडीपी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को जारी रखते हुए समय पर ही चुनाव कराने का पक्ष रखा।
जुत्शी ने कश्मीर संभाग के तमाम जिलों के जिला उपायुक्तों से बाढ़ के बाद बनी परिस्थितियों के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने घाटी के दूर दराज इलाकों में मतदान केंद्रों और सड़क संपर्क का हाल भी जाना।
'प्राथमिकता बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास'
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये तमाम जिला उपायुक्तों ने जुत्शी को वर्तमान परिस्थितियों से अवगत कराया। तमाम राजनीतिक दलों द्वारा दी गई राय और प्रशासन द्वारा दिए गए इनपुट के बाद रियासत में समय पर ही विधानसभा चुनाव होने के आसार हैं।
श्रीनगर में चुनाव आयुक्त से मुलाकात के दौरान नेकां के अली मोहम्मद सागर, देवेंद्र राणा और नासिर असलम बानी ने कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास और उनको राहत पहुंचाना है। मौजूदा हालात में चुनाव पार्टी की प्राथमिकता नहीं हैं।
नेकां नेताओं ने हालात के मद्देनजर चुनाव स्थगित करने की राय दी। जबकि पीडीपी नेता दिलावर मीर और नई अख्तर ने कहा कि वर्तमान सरकार के पास चाहे तीन महीने का समय हो अथवा तीन साल का बाढ़ पीड़ितों की हालत में सुधार की सरकार से कोई उम्मीद नहीं है।
'सरकार का जल्द गठन होना जरूरी'
रियासत में एक मजबूत सरकार का जल्द गठन होना जरूरी है। लिहाजा, लोकतांत्रिक परंपरा को जारी रखते हुए समय पर ही रियासत में विधानसभा चुनाव कराने चाहिए।
चुनाव आयुक्त विनोद जुत्शी ने बताया कि रियासत के दोनों संभागों जम्मू और कश्मीर के हालात संबंधी और यहां के विभिन्न राजनीतिक दलों की राय संबंधी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर वे मुख्य चुनाव आयुक्त को सौंपेंगे।
इसके बाद चुनाव आयोग की टीम रियासत का दौरा भी कर सकती है। उसके बाद ही विधानसभा चुनाव कराने संबंधी कोई भी फैसला लिया जाएगा।