रियासत की नई सरकार के गठन पर जमी बर्फ अगले दो-तीन दिन में कुछ पिघलनी शुरू हो सकती है। पीडीपी संरक्षक तथा पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद शनिवार तक जम्मू पहुंचेंगे।
माना जा रहा है कि वे यहां राज्यपाल से मिलकर नई सरकार के गठन को लेकर उत्पन्न गतिरोध और राजनीतिक अस्थिरता पर बातचीत कर सकते हैं। उनकी भाजपा नेताओं से भी सरकार गठन के मुद्दे और सात फरवरी को होने वाले राज्यसभा चुनाव के बाबत आपसी सहमति के मसौदे पर चर्चा हो सकती है।
चुनाव परिणाम की घोषणा के बाद से मुफ्ती श्रीनगर में ही हैं। इस बीच, पीडीपी और भाजपा के बीच सरकार बनाने को लेकर बातचीत शुरू हुई, लेकिन, यह सिलसिला किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सका।
पीडीपी की शर्तों ने रोका था गठबंधन का रास्ता
पीडीपी की शर्तों से किसी मुकाम तक पहुंचती लग रही बातचीत में गतिरोध आ गया। भाजपा नेता सरकार बनाने के लिए सिद्धांतों तथा विचारों से समझौता न करने का राग अलापने लगे।
बातचीत सकारात्मक देखकर पीडीपी ने मोदी से मुलाकात के दौरान होने वाली बातचीत का मसौदा भी तैयार कर लिया। इसी दौरान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बुलावे पर दिल्ली पहुंचे राज्य कोर कमेटी के रुख के बाद से बातचीत का सिलसिला लगभग थम सा गया।
उमर के कार्यकारी मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने से इनकार करने के बाद आखिरकार राज्य में राज्यपाल शासन लागू हो गया। इसको लेकर पार्टियों में उमर को जमकर कोसा था।
बातचीत शुरू करने के नेताओं ने दिए संकेत
सूत्रों का कहना है कि जनता तथा जनप्रतिनिधियों में पैदा हुई नाराजगी तथा बेबसी को भी भाजपा नेताओं ने पार्टी हाईकमान तक पहुंचाया है। लोगों की बढ़ती नाराजगी को देखते हुए पार्टी नेतृत्व ने सरकार गठन को लेकर बातचीत जल्द शुरू करने के राज्य के नेताओं को संकेत भी दिए हैं।
राज्यसभा चुनाव में रियासत की चार सीटों पर कब्जे को लेकर पीडीपी और भाजपा के बीच नजदीकियां बढ़ना तय है। दोनों दल आपसी सहमति के फार्मूले के आधार पर दो-दो सीटों पर समझौता कर सकते हैं।
इसके लिए दोनों दलों को एक दूसरे के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। पिछले राज्यसभा चुनाव में नेकां तथा कांग्रेस ने गठजोड़ कर दो-दो सीटों पर कब्जा जमा लिया था।
पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर का कहना है कि नेकां की समर्थन की घोषणा दिखावा मात्र है। पीडीपी और नेकां के बीच समीकरण बनता नहीं दिख रहा है। उन्होंने बताया कि मुफ्ती मोहम्मद सईद इसी सप्ताह जम्मू आने वाले हैं। उनके आने पर सरकार गठन तथा राज्यसभा चुनाव पर सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।