राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने सरहद पर पाकिस्तान की नापाक हरकत और अशांत कश्मीर के मद्देनजर नई कार्ययोजना बनाई है। शंखनाद 2016 के तहत सर संघ चालक मोहन भागवत रियासत के दो दिवसीय दौरे के क्रम में स्वयंसेवकों को नई रणनीति के संदर्भ में संदेश देंगे।
मुहिम के तहत राष्ट्रवादी शक्तियों को एकजुट करने के प्रयास भी होंगे। नारी शक्ति संगम के कार्यक्रम में भागवत महिलाओं का भी मार्गदर्शन करेंगे।सर्जिकल स्ट्राइक के बाद बार्डर और एलओसी पर तनाव के मद्देनजर सर संघ चालक का दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
13 और 14 नवंबर के दौरे के क्रम में संघ प्रमुख का जम्मू संभाग के अलावा कश्मीर और लद्दाख के स्वयं सेवकों और बुद्धिजीवियों से भी विचार विमर्श प्रस्तावित है।
कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ होगी बैठक
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अलगाववादियों और राष्ट्र विरोधी तत्वों के खिलाफ संघ कड़ी कार्रवाई का पक्षधर रहा है। पाकिस्तान को सबक सिखाने की प्रेरणा में भी संघ की भूमिका रही है। रक्षा मंत्री मनोहर परिकर सर्जिकल स्ट्राइक के साहसिक कदम को संघ की प्रेरणा का परिणाम बता चुके हैं।
तनाव के इस माहौल में संघ प्रमुख के दौरे से राष्ट्रवादी ताकतों का हौसला मजबूत करने प्रयास होगा।संघ के प्रांत कार्यवाह पुरुषोत्तम दधिची कहते हैं कि संघ प्रमुख के जम्मू प्रवास के क्रम में जिला और तहसील की कार्यकारिणी के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ भी उनकी बैठक होगी।
योग प्रदर्शन और सूर्य नमस्कार के बाद परेड मैदान में भागवत का सार्वजनिक संबोधन होगा। संघ के स्थानीय पदाधिकारियों ने इसके लिए जोर शोर से तैयारियां शुरू कर दी है।
कई मुस्लिम सरपंच राष्ट्रवादी अभियान से जुड़े
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गौरतलब है कि कश्मीर हिंसा ने संघ के संगठनात्मक विस्तार को प्रभावित किया है। हालांकि, संघ से जुड़े संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के प्रयास से आतंकवाद प्रभावित सोपोर में भी कई मुस्लिम सरपंच राष्ट्रवादी अभियान से जुड़े थे।
कुपवाड़ा, अनंतनाग, बारामुला और लद्दाख के कई बच्चे अब दिल्ली, राजस्थान, और हरियाणा स्थित संघ से जुड़े स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। संघ से संबंधित कोचिंग संस्थानों में भी मुस्लिम बच्चों की संख्या बढ़ी है। रियासत में वर्तमान में संघ की 306 शाखाएं चल रहीं हैं। 78 स्थानों पर साप्ताहिक मिलन और 100 जगह मासिक मंडली की बैठकें होती हैं।