जम्मू कश्मीर में अलगाववादियों के खौफ के कारण अल्पसंख्यक आयोग नहीं बन पा रहा है। अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जे के कारण रियासत में केंद्रीय कानून सीधे तौर पर लागू नहीं होता और रियासत सरकार ने हिंदुओं को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखने के लिए अलग कानून बनाने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई।
नतीजतन जम्मू कश्मीर में बहुसंख्यक मुस्लिमों को अल्पसंख्यक की सुविधाएं मिल रही हैं और इसके वाजिब हकदार इस सुविधा से वंचित हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय भी जम्मू-कश्मीर के बहुसंख्यक मुस्लिमों को अल्पसंख्यक मानते हुए छात्रवृत्ति की सुविधाएं दे रहा है। अलगाववादियों ने मुस्लिमों के बजाय हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा दिए जाने का विरोध किया है।
रियासत सरकार को लगता है कि नया अल्पसंख्यक आयोग बनाने से बंद और हड़ताल का नया दौर शुरू हो सकता है। यही खौफ अल्पसंख्यक आयोग की राह में सबसे बड़ी बाधा है। जम्मू कश्मीर के समाज कल्याण मंत्री सज्जाद लोन कहते हैं कि रियासत में अल्पसंख्यक आयोग बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।