प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने कहा है कि कश्मीर में सभी हितधारकों से वार्ता का मुद्दा उठाने वाले सियासी दलों के दिमाग में एक खास कीड़ा पलता है।
नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी का नाम लिए बगैर डा. सिंह ने कहा कि कश्मीर में खुद को मुख्यधारा का सियासी दल बताने वाली राजनीतिक पार्टियां दरअसल अलगाववादियों की ही हितैषी रही हैं। यह ए और बी टीम जैसा है। इन दलों और अलगाववादियों के बीच की लकीर बड़ी पतली है।
अमर उजाला से खास बातचीत में डा. सिंह ने कहा कि अलगाववादियों के हितैषी दल उनसे बातचीत पर जोर देते हैं और अलगाववादी बातचीत करना नहीं चाहते।
अलगाववादियों को लगता है कि अगर उनका ग्रुप केंद्र और केंद्र के प्रतिनिधि से बातचीत को तैयार होता है तो उनकी राजनीति बंद हो जाएगी। पाकिस्तान के सामने भी उन्हें अपना वजूद दिखाना होता है इसलिए ऐसे ग्रुप मामले को उलझाए रखना चाहते हैं। केंद्र हमेशा वार्ता को तैयार रहा है। अलगाववादियों को बातचीत से किसने रोका है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह कई बार कश्मीर आए और बातचीत का खुला आफर दिया। गवर्नर सत्यपाल मलिक भी लोगों से सीधे मिल रहे हैं।
वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा ने कश्मीर के हर कोने का दौरा किया और जो लोग बातचीत के लिए आए, उन सबसे बातचीत की। दरअसल कुछ लोगों के दिमाग में एक कीड़ा पलता है कि अलगाववादियों से बातचीत ही समाधान है। ऐसे लोग अलगाववादियों की वकालत करते रहे हैं।
डा. सिंह ने कहा कि कश्मीर के अवाम ने नेकां और पीडीपी दोनों को खारिज कर दिया है। निकाय चुनाव में इन दलों और अलगाववादियों ने चुनाव बहिष्कार का एलान किया लेकिन चुनाव हर क्षेत्र में हुए।
अब पंचायत चुनाव में लोगों की भागीदारी और बढ़ने वाली है। कुछ लोग फेक फ्रीडम स्ट्रगल की बात करते हैं। अब फारूक अब्दुल्ला ने आयरलैंड माडल का सुझाव दिया है।
यह मुद्दों से भटकाने की कोशिश है। दरअसल ऐसे दल स्वायत्तता के पक्षधर नहीं हैं। असली स्वायत्तता तो निकाय और पंचायत चुनाव से मिलती है, जिसका इन दलों ने बहिष्कार किया।
उन्होंने कहा कि नेकां और पीडीपी का स्वायत्तता फार्मूला दरअसल कुछ नेताओं के परिवार को स्वायत्तता की वकालत है। ये लोग सुविधा की सियासत करते रहे हैं। जब सत्ता में होते हैं तो कश्मीर को भारत का अटूट अंग बताते हैं और जब सत्ता छिनती है तो स्वायत्तता और अलगाववाद की पैरवी करने लगते हैं।
कश्मीर में भाजपा के प्रवेश से बदलेगा माहौल
डा. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कश्मीर में भाजपा का प्रवेश हो चुका है और अब भाजपा कश्मीर में ऐसी सच्चाई है, जिसे कोई नकार नहीं सकता। भाजपा ही असली मुख्यधारा है।
अब नेकां, पीडीपी और अलगाववादियों के बेनकाब होने का वक्त आ गया है। कश्मीर ने अब पारिवारिक राज को खारिज करने का मन बना लिया है। श्रीनगर में जुनैद मट्टू का मेयर बनना इसका पहला बड़ा सबूत है।
अलगाववाद माडल फेल, कश्मीर युवा मुख्यधारा में शामिल हो रहे डा. सिंह ने कहा कि अब हर साल आईएएस की परीक्षा में कश्मीर से कोई न कोई टाप टेन में होता है।
आईआईटी में हर साल 30 से 40 छात्र और मेडिकल में 50 कश्मीरी छात्र सफल हो रहे हैं। सेना और सुरक्षा बल में शामिल होने के लिए कश्मीरी युवाओं में होड़ लगी है। आतंकी संगठनों में भर्तियां कम हो गईं। अलगाववाद और आतंकवाद का माडल फेल हो रहा है।