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एलओसी पर जाने से पहले बदला जाता माइंड सेट

Thu, 10 Mar 2016 10:12 AM IST
भूपेंदर सिंह भाटिया, अमर उजाला/जम्मू

सार

  • सेना के जवानों को आतंकवादियों का सामना करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • कोर बैटल स्कूल (सीबीएस) में माइंड सेट बदला जाता है, ताकि वे आतंक निरोधी अभियान के दौरान विपरीत परिस्थितियों में आतंकवादियों का बखूबी सामना कर सकें। 
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भारत-पाक बार्डर पर गश्त करते जवान - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारत-पाक नियंत्रण रेखा से। चारों ओर घना अंधेरा। हाथ से हाथ नहीं सूझ रहा। उबड़-खाबड़ पहाड़ और घना जंगल। ऐसे माहौल में सेना के 1800 जवानों को आतंकवादियों का सामना करने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। 
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घने जंगल में आवाज पहचान कर आतंकियों का पता लगाना और उन्हें धराशायी करने का अनोखा प्रशिक्षण नियंत्रण रेखा से मात्र पांच किलोमीटर दूर दिया जाता है। 

जवानों को प्रशिक्षण देने वाले सेना के प्रशिक्षकों का कहना है कि जम्मू कश्मीर, खासकर एलओसी पर जाने से पहले प्रत्येक सैनिक और अफसर का कोर बैटल स्कूल (सीबीएस) में माइंड सेट बदला जाता है, ताकि वे आतंक निरोधी अभियान के दौरान विपरीत परिस्थितियों में आतंकवादियों का बखूबी सामना कर सकें।
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ऐसे पता लगाया जाता है सीमा पर घुसपैठ का

एलओसी पर तैनात बीएसएफ का जवान - फोटो : PTI
सेंस आफ डेंजर (खतरे का आभास) नामक इस कोर्स में सैनिकों को हैंड हैंडल थर्मल इमेजर्स (एचएचटीआई) के उपयोग की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें 25 लाख रुपये की कीमत वाले इस आधुनिक डिवाइस से आतंकियों की हरकतों को देखने के बाद उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सके। 

इस दौरान सैनिकों को यह भी बताया जाता है कि एलओसी पर आतंकियों की उपस्थिति की जानकारी मिलने के बाद उन्हें घेरने के लिए क्या एहतियात बरतें, ताकि दुश्मनों को उनका पता तक न चल पाए। सेना के प्रशिक्षक के अनुसार कई बार जवान आतंकवादियों के क्षेत्र में टार्च या लाइटर जलाने की गलती कर बैठता है और उन्हें छोटी से गलती के कारण जान तक गंवानी पड़ जाती है।

घने अंधेरे में आतंकियों और दुश्मनों की प्रत्येक हरकत पर कैसे बारीकी से नजर रखी जाए। दुश्मन सैनिकों के चलने की आवाज, दूरदराज गांव में बरतन गिरने, दुश्मन के छींक मारने पर उसके स्थान का अहसास करने की क्षमता बढ़ाने जैसी आधुनिक ट्रेनिंग सैनिकों को दी गई।
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