शहर में अधिकतर लोकल बस और मेटाडोर चालकों की ओर से नोइस पोल्यूशन एक्ट को ताक पर रखकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। अधिकतर चालक अपने वाहनों में तेज आवाज में स्टीरियो चला कर रहे हैं।
जबकि एक्ट कहना है कि ड्राइविंग करते समय तेज आवाज में गीत से चालक का ध्यान भटकता है, जिससे चालक का वाहन पर से नियंत्रण हटने से हादसे की आशंका बनती है। इसके साथ ही अधिकतर सवारियों को भी तेज आवाज से परेशानी होती है।
शहर की अधिकतर मेटाडोर और लोकल रूट की बसों में तेज आवाज में गीत चलाए जाते है, जिस कारण ध्वनि प्रदूषण तो होता है इसके साथ ही बुजुर्ग या कम सुनने वाले लोगों को कान से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
अधिकतर चालक नोइस पोल्यूशन एक्ट से भली - भांति परिचित होते हैं। बावजूद खुद के मनोरंजन और युवाओं को आकर्षित करने के लिए स्टीरियो या म्यूजिक सिस्टम चलाते हैं। एक्ट के तहत यह बिलकुल गलत है।
सवारी वाहन में इस तरह से तेज आवाज में म्यूजिक सिस्टम नहीं चलाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि पहाड़ी इलाकों में चालक का ध्यान सिर्फ उसकी ड्राइविंग पर होना चाहिए।
सवारी को स्टापिज पर सहीं से उतारने और सावधानी के साथ चढ़ाना कंडक्टर का काम है। अब तक सामने हुए मेटाडोर के हादसों में ओवर लोडिंग, ओवर स्पीड, रेस लगाना आदि कारण सामने आएं हैं, जिनमें से तेज आवाज को भी चालक का ध्यान भटकने से हादसा होने का कारण माना जाता है।