मुख्यमंत्री के रूप में महबूबा मुफ्ती को कई चुनौतियों से जूझना होगा। कांटों भरा ताज सोमवार को उनके सिर बंधेगा। गठबंधन पार्टनर भाजपा के साथ तालमेल बिठाने के साथ ही मुफ्ती के शपथ ग्रहण के वक्त तैयार न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) को लागू कराने की चुनौती होगी।
इसके साथ ही मुफ्ती के तीनों खित्तों के विकास, अमन, शांति तथा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने की भी चुनौती से उन्हें जूझना होगा। राज्य के तीनों हिस्सों-श्रीनगर, जम्मू और लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान केंद्रित करना होगा।
मुफ्ती मोहम्मद सईद के समय तय सीएमपी में अफस्पा की नए सिरे से समीक्षा की बात कही गई थी। इसके साथ ही अनुच्छेद 370 पर यथास्थिति कायम रखने, रियासत में अमन-शांति के लिए पाकिस्तान से बातचीत करने के केंद्र सरकार की पहल में राज्य सरकार सहयोग देगी ताकि सौहार्दपूर्ण वातावरण बन सके।
कश्मीरी पंडितों की घाटी में ससम्मान वापसी भी प्रमुख मुद्दा रहेगा। सरकार बनने के बाद केंद्र सरकार ने टाउनशिप बसाने की बात कही थी, लेकिन घाटी में विरोध को देखते हुए इस दिशा में बहुत कुछ नहीं हो पाया है।
वोट बैंक को संभाले रखने की भी होगी चुनौती
अपने दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद के साथ महबूबा मुफ्ती
- फोटो : फाइल
सेना को दी गई जमीन को खाली कराने का भी सीएमपी में जिक्र था, जिस पर बहुत हद तक काम हो चुका है। सेना ने श्रीनगर के तोस मैदान की जमीन खाली कर दी है। डुलहस्ती और उड़ी पावर प्रोजेक्ट को रियासत में वापसी के लिए प्रयास करना होगा।
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का मुफ्ती का सपना पूरा करना भी सरकार के लिए होगी चुनौती। इन सबके साथ आने वाले निकाय तथा पंचायत चुनाव में अपने को दोबारा साबित करने की भी परीक्षा होगी।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि महबूबा के पास राजनीति का अनुभव तो है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भगवा ब्रिगेड के साथ तालमेल बिठाने तथा इस चक्कर में अपने वोट बैंक को संभाले रखने की उन्हें हर वक्त कोशिश करनी होगी।
दोनों दलों के बीच मतभेद के मुद्दे
अफस्पा हटाना : पीडीपी सेना को मिले इस अधिकार को हटाने की पक्षधर है तो भाजपा इसके विरोध में है।
अनुच्छेद 370 हटाना : पीडीपी राज्य के विशेष दर्जे से किसी प्रकार का समझौता नहीं चाहती है तो भाजपा इसे हटाने की पक्षधर है।
विधानसभा क्षेत्रों का पुनर्गठन : भाजपा ने चुनाव में विस क्षेत्रों के पुनर्गठन का वादा किया था, जबकि पीडीपी ऐसा नहीं चाहती है।