मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि राज्य के लोगों द्वारा दो दिन पहले सात अमरनाथ यात्रियों की हत्या की प्रतिक्रिया बताती है कि कश्मीरियत की भावना जीवित है और आज बहुत जीवंत है। राज्य के लोग दशकों से हिंसा के शिकार होने के बावजूद इस तरह के निंदनीय कृत्यों को अस्वीकार करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस लगन के साथ अलग विचारधारा के बावजूद समाज के हर वर्ग ने हत्याओं की निंदा की है, यह दर्शाता है कि जिस मूल्यों के लिए राज्य जाना जाता है, वह अक्षुण्ण और जीवंत है।
स्थानीय युवाओं द्वारा घायल लोगों के लिए रक्तदान करना, स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बचाव कार्यों में सहायता, छात्रों, व्यापारियों, वकीलों, कार्यकर्ताओं, लेखकों और नागरिक समाज के सदस्यों के धरने सांप्रदायिक या क्षेत्रीय आधार पर राज्य के लोगों को विभाजित करने में पूरी तरह से जुटे लोगों को जबाव है।
'अमरनाथ यात्रा कश्मीर में एक पुरानी प्रथा'
Mehbooba Mufti
- फोटो : File Photo
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अमरनाथ यात्रा कश्मीर में एक पुरानी प्रथा है। इसमें स्थानीय मुस्लिम समुदाय सहायता करते हैं। कश्मीर के सहिष्णु चरित्र की सुंदरता यह है कि पवित्र गुफा की खोज स्थानीय मुस्लिम द्वारा की गई थी।
मुख्यमंत्री ने देश के लोगों की सोच की सराहना की, जो देश में सांप्रदायिक दंगों को प्रेरित करने के लिए अपराध के षड्यंत्रकारियों की साजिश का शिकार नहीं हुए। उन्होंने कहा कि वारदात के तुरंत बाद जब उन्होंने यात्रियों से मुलाकात की थी, तो मृतकों के परिवारों द्वारा दिखाई गई परिपक्व प्रतिक्रिया ने उन्हें प्रभावित किया था।
'त्रासदियों ने सबक सिखाया है'
Mehbooba Mufti
- फोटो : File Photo
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इस दुखद घटना से यह सामने आया है कि राज्य व देश के बाकी हिस्सों ने इस तरह के निंदात्मक कृत्यों को खारिज कर निर्दोषों के खून को रंग न देने में एकजुटता दिखाने लगे हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र व गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने अपने राज्यों से यात्रियों की भावनाओं को प्रतिध्वनित किया और कश्मीर के लोगों को उनके दर्द और शीघ्र बचाव अभियान को साझा करने के लिए धन्यवाद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि त्रासदियों ने सबक सिखाया है। लोगों को किसी भी तरह की हिंसा के खिलाफ एकजुट किया है, जो शांतिपूर्ण वार्ता और बातचीत से मुद्दों व मतभेदों को हल करने के लिए एक रोशनी की किरण प्रदान करता है।