जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा एडिशनल एडवोकेट जनरल (एएजी) के रूप में कठुआ बलात्कार और हत्या मामले में मुख्य आरोपी का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील असीम साहनी की नियुक्ति पर राजनीतिक खेमे में हलचल शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इसे विडंबनापूर्ण ठहराया है। जबकि साहनी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अगर तर्क यह है तो फिर किसी को भी कसाब, दाऊद, अदि जैसे लोगों के केस नहीं लड़ना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने सोशल नेटवर्किंग साईट ट्विटर पर किए गए अपने एक ट्वीट में महबूबा ने लिखा कि यह विडंबनापूर्ण है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय का विश्व दिवस मनाने के ठीक एक दिन बाद, भयानक कठुआ बलात्कार और हत्या में डिफेन्स काउंसिल को एडिशनल एडवोकेट जनरल नियुक्त किया गया है।
वहीँ इस मामले में महबूबा ने राज्यपाल से हस्तक्षेप करने को कहा है। अपने एक अन्य ट्वीट पर महबूबा ने लिखा कि कथित हत्यारों और बलात्कारियों की रक्षा करने वाले लोगों को पुरस्कृत करना घिनौना और न्याय की भावना का चौंकाने वाला उल्लंघन है। ऐसा कदम केवल हमारे समाज में बलात्कार संस्कृति को प्रोत्साहित करने के लिए काम करेगा। उम्मीद है कि राज्यपाल हस्तक्षेप करेंगे।
वहीँ असीम साहनी ने भी अपना पक्ष रखते हुए पहले कहा है कि हाईकोर्ट में व्यस्तता के चलते 2 जुलाई से वह रसाना मामले में नहीं जा रहे थे। उन्होंने कहा कि आरोपी का वकील होने के कारण क्या एक वकील को भी आरोपी बना देता है। वकील प्रोफेशनल होते हैं और किसी को मना नहीं कर सकते हैं। एएजी बनने पर अब राज्य के खिलाफ कोई भी मामला नहीं लडूंगा किसी भी मामले का चुनाव नहीं करेगा।
महबूबा मुफ्ती के ट्वीट के जवाब में उन्होंने भी ट्विटर पर लिखा कि मैं वकील हूं या आरोपी? मेरे साथ अच्छे रहिये, एक दिन मैं आपका वकील भी हो सकता हूं। एक अन्य ट्वीट में महबूबा मुफ्ती को जवाब देते हुए साहनी ने लिखा कि अगर तर्क यह है तो फिर कसाब, अफज़ल, सलमान, संजय दत, आदि आरोपियों का मामला कोई नहीं लड़ सकता है फिर।
गौरतलब है कि रसाना मामले में दायर की गई चार्जशीट के अनुसार 8 आरोपियों को 8 वर्षीय लड़की के साथ रसाना गांव में नशीली दवाइयां देकर लगातार बलात्कार किया था और बाद में उसकी हत्या कर दी थी।