मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि कश्मीर की हिंसा पूर्वनियोजित है और यह मुट्ठी भर लोगों की साजिश का नतीजा है। एनकाउंटर को बहाना बनाकर कुछ लोगों ने हालात खराब किए।
उन्होंने कहा कि जो आजादी कश्मीर के लोगों को नसीब है वह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, तुर्की और सीरिया जैसे इस्लामिक देशों में रहने वालों को नहीं है। उन्होंने कहा कि ये देश आजाद हैं, लेकिन, वहां के लोगों की हालत अच्छी नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बंदूक किसी समाज में जगह बना लेती है तो आजादी के मायने खत्म हो जाते हैं। इस दौरान उन्होंने केंद्र से कश्मीर में सभी पक्षों से बातचीत की अपील की।
बच्चों को हथियार बनाकर फैलाई जा रही हिंसा
पीड़ित के परिवार वालों से मिलतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
मुख्यमंत्री ने कहा कि रियासत में सरकार के गठन के बाद से ही कभी हंदवाड़ा तो कभी सैनिक कालोनी को मुद्दा बनाकर हालात खराब करने की कोशिश की गई। बच्चों को हथियार बनाकर हिंसा फैलाई जा रही है। कहा कि बंदूक किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। इसी तरह पत्थरबाजी भी समाधान नहीं है।
सोमवार को जम्मू के भगवती नगर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का उद्घाटन और बाग-ए-बाहु में साउंड, लाइट एंड लेजर शो व म्यूजिक फाउंटेन की आधारशिला रखने के बाद महबूबा ने अपने संबोधन में कहा कि 2010 में जो कुछ हुआ, इस बार ऐसा कुछ नहीं है।
तब लोगों का फर्जी एनकाउंटर हुआ, फिर सोपोर में दो बच्चियों से बलात्कार कर हत्या की गई। साथ ही राह चलते मासूम लोगों पर गोलियां चलीं। आज किसी भी आम आदमी पर किसी तरह का कोई जुल्म नहीं हुआ।
महबूबा ने की सुरक्षा बलों की तारीफ
प्रधानमंत्री से बात करतीं महबूबा मुफ्ती
- फोटो : Amar Ujala
आतंकी बुरहान वानी की मुठभेड़ में मौत पर उन्होंने कहा कि इसमें नया कुछ भी नहीं है। पिछले ढाई दशक से कश्मीर में कई एनकाउंटर हुए। लेकिन, इस बार इस बहाने हालात खराब किए गए। मुट्ठी पर लोग मासूम बच्चों के साथ पुलिस स्टेशन जाते हैं और पुलिस से बंदूक छीनने की कोशिश करते हैं।
बच्चों से पुलिस स्टेशन पर पेट्रोल बम फेंकवाते हैं। सीआरपीएफ कैंप पर हमला करवाते हैं। जब सुरक्षा बल कार्रवाई करने पर मजबूर हो जाते हैं, तो ये लोग भाग जाते हैं।
खामियाजा छोटे-छोटे बच्चों को उठाना पड़ता है। महबूबा ने सुरक्षा बलों की तारीफ करते हुए कहा कि अपनी तरफ से पूरा संयम बरतने के बावजूद जब लोग उनके कैंप में घुस जाते हैं, तो उन्हें कार्रवाई करने को मजबूर होना पड़ता है।