रविवार को स्व. मुफ्ती मोहम्मद सईद की चहारुम की रस्म संपन्न होते के साथ ही रियासत की नई सरकार की सूरत को लेकर सरगर्मियां तेज हो गईं। इसी क्रम आज शाम श्रीनगर में महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी के विधायकों के साथ एक बैठक भी की है।
रविवार को जो प्रमुख चर्चाएं रहीं उनके मुताबिक महबूबा ने भाजपा की कथित शर्तों के जवाब में अपनी तरफ से भी चार शर्तें रखीं है जिनमें रोटेशन सीएम न होना, उप मुख्यमंत्री का पद समाप्त करना, संवेदनशील मुद्दों को ठंडे बस्ते में डालना और केंद्र से ज्यादा मदद मुहैया कराने का आश्वासन शामिल है।
इसके अलावा मातमपुर्सी के लिए श्रीनगर पहुंचीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महबूबा मुफ्ती की 20 मिनट लंबी मुलाकात को भी रियासत की सियासत में बदलाव की दस्तक के रूप में देखा जा रहा है।
निर्मल सिंह ने गठबंधन जारी रहने का भरोसा जताया
रविवार को केंद्र के प्रतिनिधि के रूप में श्रीनगर पहुंचे केंद्रीय भूतल एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी महबूबा से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। इस बीच भाजपा के केंद्रीय और प्रादेशिक नेताओं द्वारा लगातार यह दावा किया जा रहा है कि सरकार को लेकर कोई दुविधा नहीं है।
हमारा गठबंधन पूरे छह साल के लिए है और यह कामयाबी के साथ चलता रहेगा। पूर्व डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने पीडीपी के साथ गठबंधन जारी रहने का भरोसा जताते हुए बताया कि पार्टी ने राज्यपाल को पत्र लिखा है कि पीडीपी जो भी फैसले लेगी उसके आधार पर बातचीत होगी। फिलहाल वे शोक में हैं।
सरकार गठन के संबंध में कोई बातचीत नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि जिस तरह से चीजें पहले से चलते आई हैं, गठबंधन जारी रहेगा। प्रार्थना है कि जल्द ही एक सिस्टम अस्तित्व में आए।
गठबंधन छह वर्षों के लिए है लेकिन राजनीति का कोई भरोसा नहीं
पूर्व डिप्टी सीएम निर्मल सिंह से यह पूछे जाने पर कि महबूबा के उत्तराधिकारी को लेकर भाजपा-पीडीपी में कोई मतभेद है तो उन्होंने कहा कि यह दुख की घड़ी है। भाजपा-पीडीपी के बीच सरकार के संबंध में कोई बातचीत नहीं हुई है क्योंकि चार दिन के शोक का समय था।
हालांकि पीडीपी सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने पत्रकारों द्वारा गठबंधन के बाबत सवाल पूछे जाने पर कहा कि गठबंधन छह वर्षों के लिए है लेकिन राजनीति का कोई भरोसा नहीं, इसमें कुछ भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि महबूबा मुफ्ती शोक से बाहर निकलेंगी तभी सरकार बनाएंगी।
सोनिया के पहुंचने से यह कयास लगाया जा रहा है कि कांग्रेस पीडीपी के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश में लगी है। वर्ष 2002 से 2008 तक भी दोनों दलों ने गठबंधन सरकार चलाई है। हालांकि, इस पर सफाई देते हुए कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सोनिया गांधी केवल शोक व्यक्त करने पहुंची थी। मुफ्ती साहब का गांधी परिवार से परिवारिक संबंध था।