मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि पीडीपी की ओर से 2005 तक विश्वास बहाली (सीबीएम) के लिए उठाए कदमों के बाद अन्य किसी भी सरकार ने इस दिशा में पहल नहीं की। इसके साथ ही राजनीतिक भागीदारी भी सुनिश्चित नहीं की गई। कश्मीर हिंसा के पीछे यह एक बड़ा कारण है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसे तत्वों से सावधान रहने का आह्वान किया जो राज्य में मौत तथा अस्थिरता चाहते हैं। श्रीनगर में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक में उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि 2005 में पार्टी के सत्ता से हटने के बाद रियासत में राजनीतिक शून्यता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
वर्ष 2015 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार बनने के बाद फिर शून्य से सब कुछ शुरू करना पड़ा। यह एक बड़ा कारण था कि पीडीपी को सरकार बनाने के लिए आगे आना पड़ा, ताकि रियासत को अनिश्चितता के दौर से निकाला जा सके और राजनीतिक सूखे की स्थिति को समाप्त किया जा सके।
लोगों से राज्य में शांति बहाली में सहयोग मांगा
महबूबा मुफ्ती
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उन्होंने कहा कि विकास तथा बातचीत का एजेंडा आफ एलायंस में प्रमुखता के साथ शामिल किया गया है। सरकार इस पर गंभीरता से काम भी कर रही है। कुछ स्वार्थी तत्व रियासत में शांति तथा विकास नहीं चाहते हैं जिन्होंने इसे पटरी से उतारने के लिए काम किया। पिछले पांच महीने में कश्मीर हिंसा के चलते सब कुछ थम गया।
इससे न केवल सरकार को नुकसान पहुंचा, बल्कि आम कश्मीरी भी प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी की तो क्षतिपूर्ति की जा सकती है, लेकिन हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों की कमी को पूरा नहीं किया जा सकता है।
उन्होंने लोगों से राज्य में शांति बहाली में सहयोग मांगा, ताकि विकास के लिए सभी पक्षकारों से बातचीत हो सके, नए रास्तों को खोला जा सके, लोगों को अधिक राहत दी जा सके।बैठक में उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रक्रिया तथा शासन साथ-साथ चलाने के लिए सभी पक्षकारों को राजी करना पीडीपी की बड़ी सफलता रही है। इस अवसर पर महासचिव मो. सरताज मदनी, निजामुद्दीन भट ने भी संबोधित किया। बैठक में पार्टी के मंत्री, विधायक तथा प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।